मुजफ्फरपुर शहर 2017 में स्मार्ट सिटी की श्रेणी में शामिल किया गया। 1528 करोड़ का फंड भी केंद्र सरकार द्वारा जारी कर दिया गया। 1072 करोड़ रुपए की व्यवस्था राज्य सरकार के अन्य विभागों से भी दिया गया। कुल 2600 करोड़ रुपए से शहर के काया कल्प की योजना शुरू हुई। लेकिन जनवरी 2026 तक यह योजना कलेक्टर निवास से समाहरणालय तक सिमट कर रह गई।
पूर्व विधायक सुरेश शर्मा के अनुसार गलियों में बसे शहर के विकास के लिए एक वृहत योजना तैयार की गई थी। जिसमें गलियों और मुख्य सड़कों का डिवाइडर सहित चौड़ीकरण, ट्रैफिक लाइट, साइड और रोड अंडर ड्रैनेज सिस्टम, स्ट्रीट लाइट्स की एक लंबी श्रृंखला, पार्किंग की व्यवस्था, टैक्सी स्टैंड, शहर को स्वच्छ रखने के लिए जगह जगह गार्बेज बॉक्स, पीने के पानी और शौचालय की व्यवस्था, शहर पर नजर रखने के लिए इंटरनेट नेटवर्क पर आधारित हाइ इंफ्रारेड कैमरों का जाल, साथ ही सिंचाई की व्यवस्था और केबलिंग की व्यवस्था तक की गई थी।
स्मार्ट सिटी परियोजना का काम मुजफ्फरपुर में तो ऐसे युद्धस्तर पर शुरू हुआ कि लगा जैसे शहर स्वर्ग सा दिखने लगेगा। लेकिन 5 साल बीतते-बीतते शहर की जो दुर्दशा शुरू हुई कि मुजफ्फरपुर जाम का शहर के नाम से जाना जाने लगा। सड़को पर धूल मिट्टी भरी हवा, गलियों के अंदर नालियों का पानी सड़क पर और बारिश के दिनों में 1 घंटे की भी अगर मूसलाधार बारिश हो जाए तो पूरा शहर स्विमिंग पूल बन जाता है। ट्रैफिक लाइट्स तो ऐसी जगह लगाई की वहां दोहरा रास्ता नहीं है फिर भी ट्रैफिक लाइट्स लगा दिया है जैसे सिकंदरपुर स्टेडियम के गेट पर , ब्रह्मपुरा थाने के पास, कलमबाग चौक, अघोरिया बाजार जैसे कई चौक चौराहे हैं।
कहीं कहीं गलियों का सुदृढ़ीकरण जरूर किया गया लेकिन गड्ढों के साथ, हर गली में आपको गड्ढे मिलेंगे। रोड अंडर ड्रैनेज की व्यवस्था शहर के अंदर जरूर किया गया लेकिन आए दिन सड़के उस जगह पर धंसती रहती हैं और ड्रेनेज सिस्टम जाम भी हो जाता है। और सबसे बड़ी बात गलियों में इतने ऊंचे ऊंचे रोडब्रेकर बनाए गए हैं जैसे की बांध बनाया गया है।
हम ये नहीं कह सकते कि शहर में कुछ भी काम नहीं हुआ है। अब कामों की फेहरिस्त आपको बताता हूं जैसे डीएम आवास से समाहरणालय तक की सड़क, ये अलग बात है कि गड्ढे और टीले उसमें भी है। समाहरणालय का गेट, जिला न्यायालय का गेट, आयुक्त कार्यालय का गेट बिल्कुल एक दम साफ-सुथरा चमकता हुआ दिखेगा।
शहर के अंदर मरीन ड्राइव जैसी परिकल्पना की गई थी जिसे पूरा करने का भरसक कोशिश किया गया। सिकंदरपुर मन तालाब की स्थिति को सुधारने की भरपूर कोशिश की गई है। चारों तरफ बैरिकेडिंग भी लगाया गया है लेकिन क्यूं कि इस तालाब का एक किनारा शहर के मेडिकल हब से भी जुड़ता है जहां कुछ दिन पहले ही इस तालाब में तैरते हुए एक नवजात का शव मिला। तालाब से लगे सड़कों से आप गुजरेंगे तो पानी के सरांध की बदबू भी आपका स्वागत करती दिखेगी।

