लोकेश नवीना और तीर्थ के बीच के दहेज उत्पीड़न का एक ऐसा मामला सुप्रीम कोर्ट में आया जहां अब केंद्र सरकार से सहायता मांगी गई है। यह खबर इसलिए जानना जरूरी है कि हमारे समाज में लिव-इन-रिलेशनशिप के मामले बड़े शहरों से छोटे शहरों की तरफ बढ़ रहे हैं।
दरअसल यह मामला बंगलुरू के डॉक्टर लोकेश बी एच द्वारा तथाकथित दूसरी पत्नी के द्वारा दहेज उत्पीड़न को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर से संबंधित है। जहां दूसरी पत्नी तीर्थ द्वारा लोकेश पर दहेज की मांग और जलाकर मारने का आरोप लगाया है।
लोकेश ने 2000 में नवीना से शादी की। बाद में फिर 2010 में लोकेश ने तीर्थ से शादी की और साथ में रहने लगा। 2016 में तीर्थ ने लोकेश पर दहेज की मांग और जलाकर मारने का आरोप लगा कर्नाटक उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर दी। बाद में उसने घरेलू हिंसा का भी मामला दर्ज कराया।
जबकि लोकेश ने पारिवारिक अदालत में इस बात की घोषणा को लेकर बंगलुरू की पारिवारिक अदालत में एक याचिका दायर की है कि तीर्थ से उसने कानूनी रूप से शादी नहीं की है,जो कि लंबित है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से सहायता मांगी है, जिसके लिए अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से इस मामले में सहयोग करने के लिए कहा है। इसके अलावा कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता नीना नरीमन को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। जो मामले की जटिलता को देखते हुए निष्पक्ष राय देंगी।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन के सिंह की पीठ द्वारा डॉक्टर लोकेश की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। जहां याचिकाकर्ता के वकील संजय नूली ने तर्क दिया है कि कानून की किताब में दहेज उत्पीड़न को पति और पत्नी के बीच का मामला कहा है। इसमें कही भी लिव-इन-रिलेशनशिप की बात का कोई उल्लेख नहीं है।

