बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर होने जा रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में दिल्ली का रुख कर रहे हैं। उन्होंने खुद ही फेसबुक के जरिए पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है। अब बड़ा सवाल कि बिहार की बागडोर अब किसके हाथों में जाएगी।
नीतीश कुमार की राजनीति अब बिहार से शिफ्ट होकर केंद्र की तरफ जाती दिख रही है। पिछले 20 सालों बिहार की राजनीति जिसके के ही इर्द गिर्द घूमती रही और जिसने बिहार को एक अलग पहचान दिलाई अब वो केंद्र की राजनीति में सक्रिय हो रहे हैं। जेडीयू की तरफ से उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित किया गया है।
नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया हैंडल फेसबुक और एक पर अपनी पुरानी इच्छा जाहिर की है जिसमें उन्होंने लिखा है कि वह बिहार के दोनों सदनों के सदस्य रहे हैं। लोकसभा के भी सदस्य रहे हैं लेकिन राज्यसभा के सदस्य कभी नहीं बन पाए। तो अब वह अपनी इच्छा जिसको लेकर उन्होंने कई बार अपनी भावनाएं मीडिया के सामने रखी हैं, अब वह पूरी करने जा रहा है।
वैसे इसकी पूरी स्क्रिप्ट मकर संक्रांति के समय ही लिखी गई थी जब जदयू और बीजेपी के नेताओं ने इस बात को कहा था बिहार की राजनीति में बड़ा उलट फेर होने वाला है, मकर संक्रांति तक इंतजार करिए। यह इंतजार 5 मार्च को खत्म होता दिख रहा है जहां नीतीश कुमार ने खुद स्वीकार किया कि वह अब राज्यसभा के सदस्य होंगे
अब बड़ा सवाल सवाल है कि नीतीश कुमार के बाद बिहार के बागडोर किसके हाथों में जाएगी। नीतीश कुमार पिछले 20 सालों से बिहार की सत्ता पर काबिज थे। बीजेपी भी नीतीश के नाम पर ही बिहार में राजनीति करती रही। पिछले चुनाव में बीजेपी के नेताओं ने तो कई बार कहीं की नीतीश कुमार ही हमारे अगले मुख्यमंत्री होंगे लेकिन नरेंद्र मोदी ने एक बार भी नीतीश कुमार का नाम नहीं लिया। यह अलग बात है कि राजनीतिक समीकरण ऐसा बना कि बिहार की बागडोर नीतीश कुमार के ही हाथों में आयी।
बिहार का अगला सीएम चेहरा बीजेपी की तरफ से हो सकता है। कतार में तो कई नाम है जैसे सम्राट चौधरी नित्यानंद राय विजय कुमार सिंह लेकिन बीजेपी की अपनी एक अलग पहचान रही है। पिछले कुछ राज्यों में हुए चुनाव के बाद भाजपा ने जो जीत दर्ज की, उसमें उन्होंने बिल्कुल नए चेहरों को मुख्यमंत्री के रूप में देकर चौंका दिया है। तो क्या ऐसी संभावना बिहार में भी बनती दिख सकती है? अब जो भी हो एक दो दिनों में इसका खुलासा हो जाएगा। लेकिन अब तय हो चुका है कि 20 सालों बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी खाली हो गई है।

