2003 के अमेरिका-इराक युद्ध में भारत सरकार ने की थी 100 करोड़ की मदद
ईरान के खिलाफ अमेरिका इजराइल का युद्ध एक खतरनाक मोड पर आ चुका है। ईरान के द्वारा अमेरिका की सहायता करने वाले अन्य देशों पर किए गए मिसाइल हमलों के बाद यह युद्ध अब World War 3 के कगार पर पहुंच चुका है। इसी बीच कांग्रेस ने 2003 के अमेरिका-इराक युद्ध के समय किए गए मदद की याद दिलाई है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने अमेरिका इराक युद्ध के बीच भारत सरकार द्वारा 100 करोड़ की मदद की याद दिलाई है। इसको लेकर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 2003 के सदन का एक नोट पोस्ट किया है। उन्होंने बताया कि संसद में एक प्रस्ताव पास कर इराक को 100 करोड़ की मदद की गई थी। जिसमें अनाज और अन्य सामग्रियों के साथ नगदी भी दी गईं थी।
अमेरिका ईरान युद्ध के बीच कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा सरकार पर ईरान के साथ खड़े होने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इसको लेकर इन्होंने अमेरिका इराक युद्ध में भारत द्वारा किए गए मदद की याद दिलाई है। इन लोगों का कहना है कि ईरान पर हमला और अयातुल्लाह अली खामनेई की मौत पर भारत सरकार को सख्त रुख अपनाना चाहिए। इसको लेकर कांग्रेस ने सदन में इस पर चर्चा की मांग भी की है।
राष्ट्रीय भावनाओं को व्यक्त करते हुए 2003 में सदन द्वारा एक प्रस्ताव पास कर इराक के विरुद्ध अमेरिका के नेतृत्व में गठबंधन सेनन द्वारा की जा रही सैनिक कार्रवाई की निंदा की गई थी। इसमें कहा गया था कि इराक में सत्ता परिवर्तन करने हेतु की गई सैनिक कार्रवाई स्वीकार नहीं है। युद्ध के फलस्वरूप इराक के मासूम लोगों विशेष कर महिलाओं और बच्चों की वेदनाएं एक गंभीर मानवीय मसाला है। यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की विशेष मंजूरी के बिना की गई है और यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर्ड के खिलाफ है। अतः यह सदन इराक के लोगों के लिए गंभीर संताप और गहन सहानुभूति प्रकट करता है
यह सदन संतोष व्यक्त करता है की संयुक्त राष्ट्र के द्वारा संताप ग्रस्त लोगों की तत्काल मानवीय सहायता की अपील पर भारत नगद और खाद्य सामग्री और दवाईयों के माध्यम से 100 करोड़ की सहायता प्रदान करता है। साथ ही यह तत्काल युद्ध समाप्ति का आह्वान करता है और गठबंधन सेना की शीघ्र वापसी की मांग करता है। इसी के साथ सदन ने संयुक्त राष्ट्र से इराक की प्रभुसत्ता और की रक्षा और इराक का पुनर्निर्माण संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में सुनिश्चित करने की मांग रखी है।

