जनगणना की प्रक्रिया का पहला चरण अप्रैल 2026 से शुरू होना है। वही मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) का काम 22 राज्यों में चुनाव आयोग द्वारा अप्रैल 2026 से फिर से शुरू किया जाना है। इसमें ऐसे पांच राज्य है जहां बंगाल जैसा माहौल फिर से देखने को मिल सकता है
केंद्र सरकार द्वारा जनगणना का काम अप्रैल 2026 से शुरू होगा जिसमें घरों की गिनती के साथ रसोई घरों की भी गिनती की जाएगी। अगर एक ही घर में 2 या उससे ऊपर रसोई घर होंगे तो वह अलग अलग परिवारों की श्रेणी में आयेंगे। पहले चरण की प्रक्रिया सितंबर 2026 तक चलेगी। इसी बीच चुनाव आयोग के द्वारा भी SIR का काम 22 राज्यों में अप्रैल 2026 से शुरू करने जा रहा है। इसके लिए आयोग ने गुरुवार को इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर सूचित किया है।
अभी बंगाल में SIR का काम अपने अंतिम चरण में है जहां 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। बंगाल में हो रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) की परिस्थिति पूरे भारत के लोगों को समाचारों के द्वारा मिलती रही है। बिहार में SIR के दौरान मचे हो-हल्ला की स्थिति ने चुनाव आयोग के सामने एक उदाहरण पेश किया था। जिसका बड़ा रूप बंगाल में दिखा। जहां ममता सरकार खुद ही केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ खड़ी हो गई थी।
बंगाल सरकार इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गई। जहां ममता बनर्जी खुद ही वकील बन चुनाव आयोग को व्हाट्सएप पर चलने वाला विभाग बता दिया। आपको बता दें कि बंगाल में 68 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कट सकता है। यद्यपि सर्वोच्च न्यायालय ने SIR की प्रक्रिया पर अड़ंगा डालने से इनकार कर दिया। लेकिन साथ में यह भी कहा कि राज्य सरकार क्रियान्वयन के तौर पर कोई तथ्य या कोई विसंगति के लिए जो सवाल उठा रही है, तो उसपर सुनवाई जारी रहेगी।
अब बंगाल जैसी स्थिति पांच राज्यों में फिर से देखने को मिल सकती है। जहां कांग्रेस या अन्य राजनीतिक दलों की सरकारें है। ये पांच राज्य हैं कर्नाटक, तेलंगाना, जम्मू कश्मीर, झारखंड और हिमाचल प्रदेश। इनमें से कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सीधी सरकार है वही झारखंड और जम्मू कश्मीर में कांग्रेस सरकार में साझेदार है। SIR का यह चरण चरण काफी संवेदनशील रहने वाला है।
दरअसल मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के साथ ही जनगणना का पहला चरण भी शुरू होगा। इस स्थिति में राज्यों में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने की सबसे बड़ी सबसे बड़ी जवाबदेही रहेगी। प्रशासनिक तौर पर विधि व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है तो राज्य सरकारों के लिए ये बहुत मशक्कत वाली जिम्मेदारी रहेगी।










