रूस यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने को पूरा विश्व प्रयास कर रहा है। अमेरिका भारत ने भी कई बार कूटनीतिक स्तर पर इसको लेकर पहल की है। अब रूस के अड़ियल रवैए को देखते हुए अमेरिका रूस के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नए सिरे से बात बन रही है जिसमें व्यापारिक संबंध डॉलर के द्वारा होगी। इससे अब यह संभावना जताई जा रही है कि सोना के भाव में एक तगड़ी गिरावट दिख सकती है।
कई देशों ने पिछले कुछ सालों से आपसी व्यापार लोकल करेंसी में करने शुरू कर दिए थे। जिसमें एक ब्रिक्स (BRICS) देशों का समूह जिसमें 11 देश शामिल है। इन्होंने अपना व्यापार अपने लोकल करेंसी में शुरू कर दिया था। जिसमें भारत और रूस के बीच रुपए और रूबल में होने लगा था। भारत और यूएई के बीच भी व्यापारिक सहमति रूपयों के लिए बन गई थी।

इन सबके बीच de-dollarization को बढ़ावा देने के प्रयासों पर अमेरिका कड़ी निगरानी रख रहा है। इसको देखते हुए अमेरिका द्वारा उनके साथ व्यापार करने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाना शुरू कर दिया था। इसके बावजूद कुछ देश नहीं झुके तो युद्ध की धमकी और ट्रेड डील करने का रास्ता अख्तियार किया। जिसका परिणामस्वरूप अमेरिका और भारत के बीच भी ट्रेड डील हुआ।
इनवेस्टर अड्डा के फाउंडर और डायरेक्टर राहुल भारती ने बताया कि अमेरिका के बादशाहत और कई देशों के बीच युद्ध की स्थिति ने विश्व में अस्थिरता का दौड़ पैदा हुआ जिसमें कई देशों के सेंट्रल बैंकों ने बड़े पैमाने पर सोने की खरीदारी शुरू दिया जिससे सोने का भाव एक साल में दोगुना हो गया। सोना आज जहां हार्ड करेंसी के रूप में पूरी दुनिया में पहली पसंद है। साथ ही राहुल ने बताया कि सोना के भाव में तगड़ी गिरावट के 10 दिन पहले उन्होंने इसकी संभावना जताई थी। इसकी वजह उन्होंने बताई कि सोना का भाव ठहर सा गया था। सोने के भाव के और गिरने की संभावना उन्होंने कम ही जताई लेकिन यह जरूर कहा कि सोने का भाव 1लाख 25 और 30 हजार के बीच ही रहेगा न कि 1 लाख से भी कम हो पाएगा।
वहीं पुष्पांजलि और हिरापन्ना ज्वेलरी शॉप के डायरेक्टर सौरव गुप्ता ने बताया कि ग्लोबल मार्केट अभी स्टेबल हो रहा है। पहले विश्व में युद्ध की स्थिति, चाइना मार्केट इकोनॉमिकल वार जैसे हालात के कारण विश्व बाजार अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था। लेकिन विश्व अब इन सब से उबर कर स्थिरता की तरफ जा रहा है। तो सोने में डाउनफॉल होने की संभावना ज्यादा दिख रही है। तो ये भविष्यवाणी करना कि सोने का भाव कहां तक जाएगा, कहना मुश्किल है।

