संघ शताब्दी वर्ष पर मुजफ्फरपुर में प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन का आयोजन
लोक शिक्षा समिति, बिहार के प्रदेश सचिव रामलाल सिंह ने कहा कि संघ शताब्दी वर्ष 2026 का उद्देश्य केवल आयोजन करना नहीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक, स्थायी और मूल्यपरक परिवर्तन लाना है। यह बात संघ शताब्दी वर्ष 2026 के अवसर पर आयोजित होने वाले प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन को लेकर मंगलवार को भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, सदातपुर, मुजफ्फरपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए लोक शिक्षा समिति, बिहार के प्रदेश सचिव रामलाल सिंह ने संघ शताब्दी वर्ष के महत्व और सम्मेलन के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ शताब्दी वर्ष का उद्देश्य केवल आयोजन करना नहीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक, स्थायी और मूल्यपरक परिवर्तन लाना है।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामलाल सिंह ने विद्या भारती द्वारा प्रकाशित पुस्तक “पंच परिवर्तन” का उल्लेख करते हुए उसके महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि ये पाँच परिवर्तन केवल विचार नहीं, बल्कि समाज के व्यवहार में उतारने योग्य जीवन मूल्य हैं। शिक्षा जगत, विशेषकर प्रधानाचार्य एवं शिक्षक वर्ग, इन मूल्यों को विद्यालयों के माध्यम से समाज तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही यहाँ भावी शिक्षकों को व्यवहारिक, वैचारिक एवं नैतिक रूप से तैयार किया जाता है।
लोक शिक्षा समिति के सचिव रामलाल सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और आधुनिक तकनीक शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएँ खोल रही हैं। यदि AI का उपयोग भारतीय मूल्यों के अनुरूप किया जाए, तो यह शिक्षा को अधिक प्रभावी बना सकता है।साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा को रोजगार एवं कौशल विकास (Skill Development) से जोड़ना आज की आवश्यकता है, ताकि विद्यार्थी आत्मनिर्भर बन सकें
इसके पश्चात मीडिया प्रमुख डॉ. सौरभ ने बताया कि यह प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन दिनांक 11 फरवरी से 14 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा। जिसमें प्रदेश भर से लगभग ढाई सौ प्रधानाचार्य भाग लेंगे।
वहीं महाविद्यालय के सचिव डॉ. ललित किशोर ने कहा कि भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय को यह गौरव प्राप्त हुआ है कि वह संघ शताब्दी वर्ष जैसे ऐतिहासिक अवसर पर इस प्रांतीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। उन्होंने बताया कि चार दिवसीय इस सम्मेलन में उद्घाटन सत्र, वैचारिक सत्र, संवाद सत्र, कार्यशालाएँ एवं मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

