
पटना। बिहार विधान परिषद सभागार में एएस फाउंडेशन, मुजफ्फरपुर की ओर से आयोजित संगोष्ठी में वैकल्पिक मीडिया, ग्रामीण पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के दौरान दो दशक पहले मुजफ्फरपुर से शुरू किए गए पत्रकारिता के प्रयोग ‘अप्पन समाचार’ पर आधारित पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया।

हिंदी के वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया ने कहा कि वैकल्पिक मीडिया और विभिन्न सामाजिक कार्यों का दस्तावेजीकरण जरूरी है। उन्होंने कहा कि हिंदी मीडिया को मुख्यधारा की मीडिया कहने से पहले यह देखना आवश्यक है कि वह अपने लोकतांत्रिक और सामाजिक दायित्वों का किस हद तक निर्वहन कर रहा है। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संदर्भ में संविधान के अनुच्छेद 19 का भी उल्लेख किया।

अप्पन समाचार’ पुस्तक का लोकार्पण
संगोष्ठी के दौरान ‘अप्पन समाचार’ पुस्तक का लोकार्पण पूर्व राज्यसभा सदस्य अली अनवर, वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया, पत्रकार हेमंत कुमार, पटना साइंस कॉलेज की प्राचार्य अलका यादव, प्रोफेसर (डॉ.) संजय कुमार सुमन और संतोष सारंग ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर (डॉ.) संजय कुमार सुमन ने की। संचालन डॉ. सुशांत कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अमृतांज इंदीवर ने किया।

कस्बाई पत्रकारिता को किया याद
कार्यक्रम में ‘अप्पन समाचार’ की रिपोर्टिंग टीम से जुड़ी महिला पत्रकारों को सम्मानित किया गया। इनमें सिमरन सहनी, अनिता कुमारी, काजल कुमारी, नेहा कुमारी, प्रियंका कुमारी, गुड़िया कुमारी, ट्विंकल कुमारी, रिमझिम कुमारी, वंदना कुमारी और नैना सुहानी शामिल रहीं।
वक्ताओं ने लगभग दो दशक पहले से कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों में इन महिला पत्रकारों द्वारा की जा रही पत्रकारिता के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उनकी भूमिका की सराहना की।

‘समाज से उभरीं हाशिये पर रही बेटियां’
पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं वरिष्ठ पत्रकार अली अनवर ने कहा कि संतोष सारंग ने मीडिया में हाशिये के समाज से आने वाली बेटियों को आगे लाने की पहल की। उन्होंने कहा कि सुदूर गांवों और वंचित समुदायों से इन महिला पत्रकारों का उभरना मीडिया की व्यापक पहुंच को दर्शाता है।
वरिष्ठ साहित्यकार संतोष दीक्षित ने मीडिया की भूमिका पर बात रखते हुए कहा कि मीडिया का काम सूचना उपलब्ध कराने के साथ समाज के प्रति निगरानी की भूमिका निभाना भी है। उन्होंने समकालीन मीडिया के कामकाज को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की।
‘सोशल मीडिया जनता के मुद्दों को सामने ला रहा’
पटना साइंस कॉलेज की प्राचार्य अलका यादव ने कहा कि करीब दो दशक पहले वंचित वर्ग की बेटियों ने पत्रकारिता के क्षेत्र में जो काम किया, वह समाज के लिए महत्वपूर्ण उदाहरण है।
पत्रकार हेमंत कुमार ने कहा कि उनके आकलन में मुख्यधारा की मीडिया में जनता के मुद्दों को पर्याप्त स्थान नहीं मिल रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया को ऐसा मंच बताया, जहां जनता के सवालों को व्यापक रूप से सामने रखने की संभावना है।
‘अप्पन समाचार’ सामाजिक सरोकारों का आईना
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर (डॉ.) संजय कुमार सुमन ने ‘अप्पन समाचार’ को सामाजिक और सत्ता से जुड़े सवालों को सामने लाने वाले प्रयास के रूप में बताया। उन्होंने भारतीय समाज में जातिगत विभाजन और जातियों के भीतर मौजूद श्रेष्ठता-बोध जैसे विषयों पर भी अपनी बात रखी।
‘अप्पन समाचार’ के सूत्रधार रहे संतोष सारंग ने इसके पीछे की अवधारणा और पत्रकारिता के प्रयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा की मीडिया में गांव-जवार और आम जनता से जुड़े मुद्दों की मौजूदगी सीमित दिखाई देती है। उनके अनुसार, करीब दो दशक पहले मुजफ्फरपुर से ‘अप्पन समाचार’ के माध्यम से शुरू किए गए प्रयोग का सामाजिक स्तर पर प्रभाव देखने को मिला।
संगोष्ठी के दौरान मौजूद रहे गणमान्य
कार्यक्रम में संजीव चंदन, अरविंद पासवान, भीष्म कुमार, डॉ. हेम नारायण विश्वकर्मा, भूपाल भारती, डॉ. अविनाश कुमार, सिद्धांत सारंग, शत्रुघ्न साहू, फुलदेव पटेल, अजय शर्मा, राकेश कुमार समेत कई लोग मौजूद रहे।










