
स्वस्थ तन-मन और विकसित बौद्धिक क्षमता, समाज एवं भारत की मजबूत आधारशिला: कुलाधिपति प्रभाकर सिंह
उमेश कांत गिरी. ब्यूरो प्रभारी घाटशिला. झारखंड.
घाटशिला/खबर जिन्दगी: सोना देवी विश्वविद्यालय के विवेकानंद सभागार में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के प्रति जागरूक किया गया। इस आयोजन का महत्व तनाव एवं दबाव से निपटने के प्रभावी उपायों पर चर्चा करना तथा स्वस्थ, सकारात्मक और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, विभागाध्यक्षों एवं विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य, बौद्धिक विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और संतुलन
कार्यक्रम का मंच संचालन मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कुसुम कुमारी लकड़ा ने किया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को विद्यार्थियों के साथ साझा किया। जीवन में मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच और भावनात्मक सशक्तता पर उन्होंने अपनी राय रखी। उनका कहना था कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित करने के लिए इस विषय पर खुलकर विचार-विमर्श करना अतिआवश्यक है।
गणित विभाग के विभागाध्यक्ष कृष्णानंद दत्ता के अनुसार, जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव अनुशासन और संतुलित दिनचर्या अपनाकर मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अपने मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने तथा स्वस्थ आदतों को दैनिक जीवन में शामिल करने के लिए प्रेरित किया।

इतिहास विभाग की छात्रा मानवी हेम्ब्रम ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी और युवा पीढ़ी की जागरूकता को रेखांकित किया।
सशक्त नागरिक राष्ट्र की वास्तविक शक्ति : डॉ. शिवचन्द्र झा
राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शिवचन्द्र झा ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति केवल आर्थिक विकास, वैज्ञानिक उपलब्धियों और शैक्षणिक उत्कृष्टता से नहीं मापी जाती। मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति न केवल अपने जीवन में बेहतर निर्णय ले सकता है। बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भी प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकता है।

विद्यार्थियों के विकास के लिए मानसिक स्वास्थ्य आवश्यक : कुलसचिव डॉ. नीत नयना
कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक सफलता के लिए मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को तनावमुक्त रहने, संतुलित दिनचर्या अपनाने तथा अपनी समस्याओं को दूसरों के साथ साझा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और भावनात्मक मजबूती विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का आधार हैं।
मानसिक स्वास्थ्य और बौद्धिक विकास से मजबूत होगा राष्ट्र: कुलपति प्रो. डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा
कुलपति प्रो. डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में मानसिक स्वास्थ्य और बौद्धिक क्षमता की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, रचनात्मकता, आत्मविश्वास और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करना भी है। विद्यार्थियों को तनावमुक्त रहने, सकारात्मक सोच अपनाने तथा योग, व्यायाम और अनुशासित दिनचर्या को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।

“हार नहीं मानूँगा* का संकल्प ले विद्यार्थी: कुलाधिपति प्रभाकर सिंह
कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों का दृढ़ता से सामना करने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया। उन्होंने अपने संबोधन में पूर्व प्रधानमंत्री एवं प्रख्यात कवि अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध कविता ‘”हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा” का उल्लेख किया।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में कठिन परिस्थितियां आने पर निराश होने के बजाय आत्मविश्वास, साहस और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ते रहना चाहिए। साथ ही विद्यार्थियों को पढ़ाई के दबाव और तनाव को कम करने के लिए अपनी दिनचर्या में पुस्तक-पठन, संगीत और योग जैसी सकारात्मक गतिविधियों को शामिल करना चाहिए।
उन्होंने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निरंतर संघर्ष, मेहनत और समर्पण के साथ कार्य करें।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. कंचन सिन्हा ने कुलाधिपति, कुलपति, कुलसचिव, विभागाध्यक्षों, वक्ताओं एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों को सहृदय धन्यवाद दिया।










