मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल में व्यवस्था पर बड़ा सवाल: सुरक्षा गार्डों को पांच महीने से वेतन नहीं,

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

Advertisements
ad

मुजफ्फरपुर/खबर जिन्दगी: मुजफ्फरपुर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाले सुरक्षा गार्ड आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। मुजफ्फरपुर के सदर अस्पताल और मॉडल अस्पताल में तैनात सुरक्षा कर्मियों को कथित तौर पर जून 2026 से यानी 5 महीनों से वेतन नहीं मिला है। जिन कर्मियों के भरोसे अस्पताल की सुरक्षा हो रही है, उसकी संकट का समाधान कौन करेगा।

पांच महीने से वेतन नहीं, बढ़ा रोजी-रोटी का संकट

अस्पताल में ड्यूटी करने वाले सुरक्षा गार्डों के सामने सबसे बड़ी समस्या नियमित वेतन मिलना है। महंगाई के इस दौर में लगातार कई महीने तक वेतन नहीं मिलने से घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और अन्य जरूरी जरूरतें प्रभावित हो जाती हैं।

सुरक्षा गार्डों ने बताया कि उनका दैनिक मानदेय लगभग 533 रुपये बताया जाता है। ऐसे में लंबे समय तक भुगतान नहीं होना उनके लिए गंभीर आर्थिक परेशानी पैदा कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अस्पताल की ड्यूटी नियमित रूप से करने वाले कर्मचारियों को अपने ही वेतन के लिए इंतजार क्यों करना पड़ रहा है?

इस व्यवस्था में कौन जवाबदेह?

सुरक्षा गार्डों के अनुसार, सदर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पहले गोस्वामी सिक्योरिटी सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के जिम्मे थी। एजेंसी की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और गार्डों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए गए थे। अस्पताल परिसर में सुरक्षा प्रबंधन की कथित कमियों के कारण ही गोस्वामी पर कार्रवाई की गई थी।

खबर जिन्दगी का मानना है कि यदि किसी एजेंसी ने सुरक्षा मानकों, कर्मचारियों की सुविधाओं या अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

नई एजेंसी के बाद भी वेतन संकट क्यों?

पुरानी एजेंसी के स्थान पर “उर्मिला फाउंडेशन” को सुरक्षा व्यवस्था सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। अब सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि नई एजेंसी के साथ अनुबंध, कर्मचारियों की सूची, उपस्थिति, बिल और वेतन भुगतान की प्रक्रिया किस स्तर पर अटकी हुई है।

कर्मचारियों ने काम किया है, तो उनके वेतन का हिसाब भी स्पष्ट होना चाहिए। प्रशासनिक असमंजस का बोझ कर्मचारियों के परिवारों पर डालना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।

पहले भी सामने आया वेतन भुगतान का विवाद

गार्डों ने बताया कि⁹ अगस्त 2026 में भी सदर अस्पताल के सुरक्षा गार्डों ने कथित तौर पर तीन महीने का वेतन नहीं मिलने के कारण कुछ समय के लिए काम बंद किया था। उस समय सिविल सर्जन और जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) के हस्तक्षेप तथा भुगतान का आश्वासन मिलने के बाद गार्डों के काम पर लौटने की बात कही गई थी।

नौकरी लगाने के नाम पर रिश्वतखोरी

सदर अस्पताल में सुरक्षा गार्डों की तैनाती को लेकर नौकरी दिलाने या काम पर बनाए रखने के नाम पर 10 हजार से 16 हजार रुपये तक मांगे जाने की शिकायतकी बात भी सामने आया है। लेकिन खबर जिन्दगी इस शिकायतों की पुष्टि नही करता है। यदि किसी व्यक्ति ने नौकरी या तैनाती के नाम पर पैसे मांगे हैं, तो उसकी जांच कर दोषी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

अस्पताल की सुरक्षा करने वालों की सुरक्षा आखिर किस पर?

सरकारी अस्पताल केवल मरीजों के इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि आम लोगों के भरोसे का आधार भी हैं। इस व्यवस्था को सुचारु रखने में सुरक्षा गार्डों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि वे महीनों तक वेतन के लिए परेशान रहते हैं, तो यह ठेका प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए।

खबर जिन्दगी का स्पष्ट मत है कि पुरानी एजेंसी की कथित अनियमितताओं की जांच होनी चाहिए और नई एजेंसी को भी अनुबंध की शर्तों का पालन करना चाहिए। किसी भी कंपनी या व्यक्ति को जांच से परे नहीं रखा जाना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

Advertisements