
कृषि, जल एवं स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं कल्याण, शिक्षा, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार तथा पर्यावरण जैसे विषय को लेकर आयोजित हो रही प्रतियोगिता
विकसित भारत के निर्माण में विद्यार्थियों की भूमिका महत्वपूर्ण : कुलाधिपति प्रभाकर सिंह
उमेश कांत गिरी, ब्यूरो प्रमुख. घाटशिला. झारखंड
घाटशिला/खबर जिन्दगी: सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला के स्वामी विवेकानंद सभागार में ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें युवाओं से सामाजिक समस्याओं की पहचान कर तकनीकी ज्ञान, रचनात्मक सोच और सेवा भावना के माध्यम से व्यावहारिक समाधान विकसित करने का आह्वान किया गया। प्रतियोगिता में कुल ₹2 करोड़ के पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं। इच्छुक प्रतिभागी 30 अक्टूबर तक आवेदन कर सकते हैं।

सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि नवाचार का उद्देश्य केवल नए विचार प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि ऐसे समाधान तैयार करना होना चाहिए, जिनसे आम लोगों के जीवन में वास्तविक सुधार हो। प्रतियोगिता में कॉलेज विद्यार्थी, व्यक्तिगत प्रतिभागी और विभिन्न टीमें भाग ले सकती हैं।
सेवा भावना से जुड़े नवाचार पर जोर
MRPL-ONGC के स्वतंत्र निदेशक लखन मरांडी ने कहा कि सेवा की भावना को नवाचार से जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से शुरू हुई यह पहल युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने का प्रयास है।

मरांडी ने विद्यार्थियों से प्रतियोगिता में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि युवाओं की ऊर्जा, तकनीकी समझ और रचनात्मक विचारों का उपयोग समाज की जरूरतों को पूरा करने में किया जाना चाहिए। उन्होंने कृषि, जल एवं स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े उपयोगी प्रोजेक्ट तैयार करने पर जोर दिया।
विकसित भारत में युवाओं की भूमिका
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व झारखंड प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेशानंद गोस्वामी ने कहा कि भारत के विकास में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है और विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए युवा शक्ति, वैज्ञानिक सोच तथा सामाजिक प्रतिबद्धता आवश्यक है।

उन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान, चंद्रयान मिशन, स्वदेशी तकनीक और रक्षा प्रणालियों में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। गोस्वामी ने आर्यभट, नालंदा और तक्षशिला जैसी भारतीय ज्ञान परंपराओं से प्रेरणा लेने की आवश्यकता बताई।

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित भारत की आधारशिला बताया। उन्होंने रोजगार, कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, महिला सशक्तिकरण और सुशासन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान पर भी जोर दिया।
शिक्षा को समाज सेवा से जोड़ने की अपील
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और रचनात्मक चिंतन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित न रखकर सामाजिक सेवा, समस्या समाधान और राष्ट्र निर्माण से जोड़ा जाना चाहिए।

युवाओं को करना होगा क्षमता का विकास
सोना देवी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने कहा कि युवाओं को अपनी क्षमताओं का विकास करते हुए समाज और राष्ट्र की उन्नति में योगदान देना चाहिए। उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, सामाजिक मूल्यों को महत्व देने और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई।
छह क्षेत्रों में प्रस्तुत किए जा सकेंगे विचार
प्रतियोगिता में कृषि एवं कृषि आधारित समाधान, जल एवं स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं कल्याण, शिक्षा, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार तथा पर्यावरण एवं सतत विकास को प्रमुख क्षेत्र बनाया गया है। प्रतिभागियों से इन क्षेत्रों में समाजोपयोगी विचार और परियोजनाएं प्रस्तुत करने की अपील की गई है।

कार्यक्रम का संचालन सहायक कुलसचिव अर्चना सिंह ने किया। उन्होंने प्रतियोगिता की रूपरेखा और सहभागिता के अवसरों की जानकारी दी। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।










