
‘नशामुक्त युवा, सशक्त भारत’ का युवाओं को दिया गया संदेश
नशामुक्त भारत का संकल्प हर नागरिक की जिम्मेदारी: कुलाधिपति प्रभाकर सिंह
उमेश कांत गिरी, ब्यूरो प्रमुख. घाटशिला. झारखंड
घाटशिला/खबर जिन्दगी: सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला में युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों, डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, जमशेदपुर के मार्गदर्शन में हुआ। इस कार्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को नशामुक्त जीवन, आत्मानुशासन, सकारात्मक चिंतन और राजयोग मेडिटेशन का महत्व बताया गया।

सोना देवी विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भारत सरकार के नशामुक्त भारत अभियान और मिशन स्पंदन के उद्देश्य को बताया गया। आयोजित कार्यक्रम में युवाओं से अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का उपयोग शिक्षा, व्यक्तित्व विकास तथा राष्ट्र निर्माण में करने की अपील की गई।

कार्यक्रम का संचालन संस्कृत विभाग की सहायक अध्यापिका कुमारी निकिता ने किया। उन्होंने कहा कि नशामुक्ति केवल मादक पदार्थों से दूरी बनाना नहीं, बल्कि नियंत्रण रखना भी है। नशा एकाग्रता, समय और मानसिक शांति को प्रभावित करती हैं।

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की वक्ता बहन वी.के. नेहा ने मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल शिक्षा, ज्ञान और रचनात्मक कार्यों के लिए होना चाहिए। युवाओं को आत्मानुशासन अपनाकर अपनी क्षमताओं को पहचानने और निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया गया।

विशेष वक्ता बहन ऊषा जी ने डिजिटल उपकरणों के अनियंत्रित उपयोग और इंटरनेट पर निर्भरता के दुष्प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने एक समय में एक कार्य पर ध्यान केंद्रित करने, समय प्रबंधन, नियमित अध्ययन और रचनात्मक गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करने पर जोर दिया। न्यूरोप्लास्टिसिटी का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि सकारात्मक सोच, नियमित अभ्यास और अच्छी आदतों से सीखने की क्षमता तथा व्यवहार में सुधार संभव है।
बहन रूपा दी ने राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से मानसिक शांति और आत्मबल बढ़ाने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को ‘मैं शांत स्वरूप आत्मा हूं’ और ‘शांति मेरा स्वधर्म है’ जैसे सकारात्मक संकल्पों का अभ्यास कराया।

सहायक कुलसचिव अर्चना सिंह ने कहा कि शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों का विकास भी जरूरी है। कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने तनाव की स्थिति में गलत आदतों के बजाय शिक्षकों, परिवार और मित्रों से संवाद करने की सलाह दी। कुलपति प्रो. डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने युवाओं को राष्ट्र की शक्ति बताते हुए तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने का आह्वान किया।

नशामुक्त भारत हर नागरिक की जिम्मेदारी : कुलाधिपति प्रभाकर सिंह
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री प्रभाकर सिंह ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि नशामुक्त युवा ही स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त भारत की मजबूत नींव हैं। युवाओं को अपने जीवन का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। नशे की लत व्यक्ति की प्रतिभा और संभावनाओं को कमजोर करती है, तथा लक्ष्यों से दूर करता है।
श्री सिंह ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने का संकल्प तभी साकार हो सकता है, जब देश का युवा शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से सशक्त और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण हो। उन्होंने डिजिटल नशे के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि मोबाइल और सोशल मीडिया का उपयोग ज्ञान, शिक्षा और रचनात्मकता बढ़ाने के लिए होना चाहिए।
नशामुक्ति पर आगे कहा कि यह केवल व्यक्तिगत संकल्प नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। परिवार, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जिसमें युवा स्वस्थ आदतें अपनाएं और अपनी प्रतिभा का उपयोग समाज तथा राष्ट्र की उन्नति में करें।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सदस्यों को नशामुक्त जीवन अपनाने और समाज को जागरूक करने की शपथ दिलाई गई। उपस्थित लोगों ने नशे से दूर रहने और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज के अन्य सदस्यों को भी जागरूक करने का संकल्प लिया।










