
A, B, AB और O ब्लड ग्रुप और इसके Positive और Negative कॉम्बिनेशन के बारे में आप सब जानते हैं। लेकिन क्या आपको बॉम्बे ब्लड ग्रुप के बारे में कोई जानकारी है? जवाब है-“नहीं” यह दुनिया के दुर्लभ ब्लड ग्रुपों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी बात अगर इस बॉम्बे ब्लड ग्रुप को यूनिवर्सल डोनर ‘O’ ब्लड ग्रुप के साथ कंबाइन किया तो बॉम्बे ब्लड ग्रुप वाले शख्स की जान भी जा सकती है।
हाल की दो बड़ी घटनाओं ने इस ब्लड ग्रुप को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। एक घटना जयपुर की है और दूसरी घटना कोलकाता की है। जयपुर मामले में तो शख्स की जान ही चली गई । दरअसल वह डायबिटीज का मरीज था। जिसकी हीमोग्लोबिन काफी कम थी। उसे बॉम्बे ब्लड ग्रुप की जरूरत थी, लेकिन अफसोस वह उपलब्ध नहीं हो पाई और आखिरकार उसकी मौत हो गई।
दूसरी घटना कोलकाता की है जहां पश्चिम बंगाल के कैनिंग के रहने वाले 71 वर्षीय सैफुल सरदार की जान बचाने के लिए पुणे से स्पेशल फ्लाइट से कोलकाता ब्लड को एयरलिफ्ट किया गया।




बॉम्बे ब्लड ग्रुप सबसे अलग कैसे ?
बॉम्बे ब्लड ग्रुप को चिकित्सा विज्ञान में बॉम्बे फीनोटाइप (HH) कहा जाता है। चिकित्सा सेवा में ब्लड ग्रुप का निर्धारण लाल रक्त कोशिकाओं के A और B एंटीजन के आधार पर किया जाता है। लेकिन बॉम्बे फीनोटाइप वाले व्यक्ति की लाल रक्त कोशिकाओं पर H एंटीजन मौजूद नहीं होता। जब यह मौजूद नहीं होता तो सामान्य ब्लड ग्रुप की पहचान ही नहीं हो पाती।
बॉम्बे ब्लड ग्रुप का पहला मरीज
बॉम्बे ब्लड ग्रुप की पहचान वर्ष 1952 में मुंबई के KEM अस्पताल में हुई थी। तब रेलवे का कोई कर्मचारी था जिसका इलाज डॉ. वाई. एम. भेंडे की निगरानी में चल रहा था और उसे खून की जरूरत थी। डॉ. भेंडें ने उसके रक्त की जांच की जिसमें इस दुर्लभ ब्लड ग्रुप का पता चला। उस समय मुंबई को बॉम्बे कहा जाता था, इसलिए इसका नाम बॉम्बे ब्लड ग्रुप पड़ा।
यह बॉम्बे फीनोटाइप ब्लड ग्रुप काफी दुर्लभ है, जो कि 10 लाख लोगों में से किसी एक में पाया जाता है। इस ब्लड ग्रुप में O ग्रुप का ब्लड भी नहीं दिया जा सकता। अगर गलती से किसी ने ब्लड चढ़ा दिया तो उस मरीज की जान भी जा सकती है।

बॉम्बे ब्लड ग्रुप की पहचान कैसे?
बॉम्बे ब्लड ग्रुप की पहचान केवल सामान्य ब्लड ग्रुप टेस्ट के आधार पर नहीं की जा सकती। इसकी पहचान के लिए एक अलग प्रकार का ब्लड टेस्ट किया जाता है, जिनमें H एंटीजन की मौजूदगी या अनुपस्थिति और संबंधित एंटीबॉडी की जांच शामिल होती है।
दरअसल जितने भी ब्लड ग्रुप हैं उन सब में है H एंटीजन होता ही है जिससे ब्लड के प्रकार की पहचान होती है। इसी से ब्लड के प्रकार A, B या O ग्रुप की पहचान होती है लेकिन बॉम्बे ब्लड ग्रुप में H एंटीजन होता ही नहीं है। ये इतना दुर्लभ है कि इसके न मिलने के कारण अब तक कइयों की जान जा चुकी है।
बॉम्बे ब्लड ग्रुप वाले लोगों का स्वास्थ्य?
बॉम्बे ब्लड ग्रुप होना अपने आप में कोई बीमारी नहीं है। इस ब्लड ग्रुप के लोग सामान्य जीवन जी सकते हैं और जरूरी नहीं कि उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में किसी तरह की परेशानी हो। बस आपातकाल जैसी स्थिति नहीं होनी चाहिए। एक जानकारी और आपके साथ शेयर कर दूं कि यह बॉम्बे ब्लड ग्रुप किसी भी ग्रुप को अपना खून दे सकता है। पर लेगा सिर्फ खुद के ग्रुप से।










