
कोलकाता: ऐतिहासिक महाजाति सदन में महान स्वतंत्रता सेनानी बिपिन चंद्र पाल की जयंती के अवसर पर ‘स्वराज के अग्रदूत लाल-बाल-पाल स्मृति पर्व’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि, केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे सहित कई विशिष्ट अतिथि, शिक्षाविद, साहित्यकार और इतिहास से जुड़े गणमान्य लोग शामिल हुए।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास, नई दिल्ली और बड़ा बाजार लाइब्रेरी, कोलकाता के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों के योगदान, स्वदेशी आंदोलन और राष्ट्रवादी विचारधारा पर विस्तार से चर्चा हुई।

राज्यपाल ने लाल-बाल-पाल के योगदान को किया याद
समारोह के मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि ने अपने संबोधन में लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल के ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि लाल-बाल-पाल की त्रिमूर्ति ने भारतीय स्वाधीनता संग्राम को नई दिशा देने के साथ उसे जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान किया।




राज्यपाल ने बिपिन चंद्र पाल के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वाधीनता, स्वदेशी और स्वभाषा का उनका संदेश आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने राष्ट्रवाद को संस्कृति, पारिवारिकता, आत्मीयता और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ा भाव बताते हुए कहा कि अनेक भाषाओं और परंपराओं के बावजूद भारतीय समाज एकता के सूत्र में बंधा हुआ है।
अश्विनी कुमार चौबे ने आयोजन की सराहना की
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि लाल-बाल-पाल ऐसे महान विचारक और राष्ट्रवादी व्यक्तित्व थे, जिन्होंने भारतीय समाज में स्वाभिमान और स्वतंत्रता की भावना को मजबूत किया।
उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों का संघर्ष और दृढ़ संकल्प आने वाली पीढ़ियों को भारतीयता और राष्ट्रीय गौरव का संदेश देता रहेगा।
देशभर से जुटे साहित्यकार, शिक्षाविद और गणमान्य अतिथि
समारोह में पश्चिम बंगाल के संसदीय कार्य, नगर विकास एवं नगर पालिका मामलों के राज्यमंत्री उमेश राय, कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आशुतोष घोष, बिपिन चंद्र पाल की , राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार, हिंदी विभाग विश्वभारती शांतिनिकेतन के डॉ. सुभाष चंद्र रॉय सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
इसके अलावा बिपिन चंद्र पाल के वंशजों में नातिन एवं शिक्षाविद इशिता चौधरी सुष्मिता चौधरी, मेलिता मालेवार, नंदिनी डे और विजयी दत्ता सहित कई साहित्यकार एवं प्रबुद्धजन कार्यक्रम में शामिल हुए।
इशिता चौधरी ने साझा किए बिपिन चंद्र पाल के पारिवारिक संस्मरण
विशेष वक्ता के रूप में उपस्थित बिपिन चंद्र पाल की नातिन इशिता चौधरी ने अपने पारिवारिक संस्मरण साझा किए। उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी के व्यक्तिगत जीवन, उनके आदर्शों, मूल्यों और पारिवारिक परंपराओं पर प्रकाश डाला। साथ ही इस आयोजन के लिए राष्ट्रकवि दिनकर स्मृति न्यास के प्रति आभार व्यक्त किया।
न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार ने अतिथियों का अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और पुस्तकें भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने आयोजन की पृष्ठभूमि और न्यास के उद्देश्यों की जानकारी भी दी।
लाल-बाल-पाल का त्याग, साहस और संघर्ष अविस्मरणीय: डॉ. संजय पंकज
मुजफ्फरपुर, बिहार से पहुंचे चर्चित कवि-गीतकार एवं साहित्यकार डॉ. संजय पंकज ने विषय प्रवेश और मंच संचालन के माध्यम से समारोह को विशेष स्वरूप दिया। उन्होंने कहा कि लाल-बाल-पाल के त्याग, साहस, संघर्ष और राष्ट्रवादी विचारों को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

उन्होंने सुझाव दिया कि इन महान स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनी और विचारों को सभी वर्गों की पाठ्यपुस्तकों में प्रमुखता से स्थान मिलना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी उनके योगदान और संघर्ष से परिचित हो सके।
‘स्वराज्य के अग्रदूत : लाल-बाल-पाल’ स्मृति ग्रंथ का लोकार्पण
समारोह का एक प्रमुख आकर्षण ‘स्वराज्य के अग्रदूत : लाल-बाल-पाल’ स्मृति ग्रंथ का लोकार्पण रहा। राज्यपाल आर.एन. रवि और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने संयुक्त रूप से इस ग्रंथ का विमोचन किया।
इस स्मृति ग्रंथ में लाल-बाल-पाल के जीवन दर्शन, राष्ट्रवादी लेखन, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका और समकालीन भारत के संदर्भ में उनके विचारों की प्रासंगिकता को समाहित किया गया है।
बड़ा बाजार लाइब्रेरी की ओर से जय गोपाल गुप्ता ने अतिथियों और आयोजन में शामिल लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि साहित्यिक संस्थाएं और पुस्तकालय ऐतिहासिक धरोहरों तथा महापुरुषों की स्मृतियों को संरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
समारोह के दूसरे सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज की वरिष्ठ शिष्या एवं संगीत नाटक अकादमी से सम्मानित शाश्वती सेन के निर्देशन में उनके सांस्कृतिक दल ने देशभक्ति से जुड़ी प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’, डॉ. संजय पंकज का आह्वान गीत ‘जागो रे जागो’ और गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर का प्रसिद्ध गीत ‘एकला चलो रे’ प्रस्तुत किया गया।
वहीं, डॉ. सुमित बसु के नेतृत्व में मैतेई जागोई सांस्कृतिक दल, शांतिनिकेतन ने रवींद्रनाथ ठाकुर की भक्ति पदावली पर आधारित नृत्य-नाटिका ‘मोहन बाँशी’ के अंश ‘निकुंजमिलन’ की आकर्षक प्रस्तुति दी।
आज भी प्रासंगिक हैं लाल-बाल-पाल के विचार
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि लाल-बाल-पाल के विचार, स्वदेशी आंदोलन और आत्मनिर्भरता का संदेश वर्तमान समय में भी महत्वपूर्ण है। उनके संघर्ष और राष्ट्रवादी चिंतन से नई पीढ़ी को प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।
महाजाति सदन में आयोजित इस स्मृति पर्व में साहित्यकारों, इतिहासकारों, शोधार्थियों, शिक्षाविदों और युवाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। राष्ट्रभक्ति के संकल्प और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
आयोजन को सफल बनाने में राजा रंजन, चंदन कुमार, जे.के. भारती, डॉ. कृष्णानंद तथा विश्वभारती शांतिनिकेतन के शोधार्थी सिंटू और अमन कुमार होली ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


