

मुजफ्फरपुर में छठ पूजा को लेकर प्रशासन अलर्ट, खतरनाक घाटों की सूची होगी जारी
मुजफ्फरपुर: लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था को लेकर 844 कैमरों से पूरे शहर का चप्पा-चप्पा प्रशासन की निगरानी में रहेगा। इसको लेकर जिलाधिकारी कुमार गौरव एवं वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्र ने अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छठ महापर्व के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस बार छठ पूजा के दौरान मुजफ्फरपुर में स्मार्ट सिटी के 844 CCTV कैमरों के साथ वीडियो कैमरा और ड्रोन से भी निगरानी की जाएगी। घाटों से लेकर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड तक सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाएंगे। वहीं, नदियों में निजी नावों के परिचालन पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन ने खतरनाक और अनुपयुक्त घाटों की पहचान कर उनकी सूची सार्वजनिक करने का भी निर्देश दिया है।
13 से 16 नवंबर तक चार दिनों का छठ महापर्व



इस वर्ष छठ महापर्व 13 नवंबर से 16 नवंबर 2026 तक मनाया जाएगा।
13 नवंबर शुक्रवार: नहाय-खाय
14 नवंबर शनिवार: खरना
15 नवंबर रविवार: संध्या अर्घ्य
16 नवंबर सोमवार: प्रातःकालीन अर्घ्य
छठ के अवसर पर बिहार के बाहर रहने वाले बड़ी संख्या में लोग भी अपने घर लौटते हैं। इसे देखते हुए डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाहर से आने वाले यात्रियों और श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। प्रशासन का उद्देश्य सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना है।
844 CCTV कैमरों से निगरानी, ड्रोन भी रहेंगे सक्रिय
छठ महापर्व के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए मुजफ्फरपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के 66 सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए कुल 844 CCTV कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा।
इनमें शामिल हैं:
365 CCTV सर्विलांस कैमरे
108 रेड लाइट वायलेशन डिटेक्शन कैमरे
216 ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन कैमरे
27 स्पीड वायलेशन डिटेक्शन कैमरे
108 व्हीकल डिटेक्शन एंड क्लासिफिकेशन कैमरे
इसके अतिरिक्त ICCC में 20 डोम कैमरे भी सक्रिय हैं। जरूरत के अनुसार घाटों और संवेदनशील स्थानों पर अस्थायी CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। वीडियो कैमरा और ड्रोन के माध्यम से भी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।
आपात स्थिति में आम नागरिक 31 स्थानों पर लगाए गए इमरजेंसी कॉल बॉक्स के माध्यम से सीधे इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) से संपर्क कर सकेंगे।
घाटों की सूची होगी सार्वजनिक, निजी नावों पर प्रतिबंध
इस बार बाढ़ के कारण नदियों के जलस्तर में वृद्धि हुआ था और यह अपने नए उच्चतम जलस्तर तक (HFL) तक पहुंच गया था। इसको देखते हुए प्रशासन ने इसबार घाटों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया है। डीएम ने गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, लखनदेई सहित अन्य नदियों और तालाबों के घाटों का संयुक्त निरीक्षण करने का निर्देश दिया है।
जिलाधिकारी द्वारा खतरनाक एवं अनुपयुक्त घाटों की सूची सार्वजनिक की जाएगी, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित घाटों का चयन कर सकें। सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह है कि छठ महापर्व के दौरान नदियों में निजी नावों का परिचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन को इस आदेश का सख्ती से पालन कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर रहेगी विशेष सुरक्षा
छठ के दौरान दूसरे राज्यों से आने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए उपयुक्त और मूलभूत व्यवस्था किया जा रहा है, जिससे भीड़ नियंत्रण में परेशानी न हो।
घाटों पर डबल बैरिकेडिंग, मेडिकल टीम और SDRF-NDRF होंगे तैनात
छठ घाटों पर सुरक्षा के लिए डबल बैरिकेडिंग, वाच टावर, नियंत्रण कक्ष और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए शौचालय, यूरिनल, चेंजिंग रूम, शेड, पेयजल और पार्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। संध्या अर्घ्य के बाद घाटों पर विशेष सफाई और फॉगिंग कराने का निर्देश भी दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग को पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस, डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की प्रतिनियुक्ति करने को कहा गया है। वहीं, आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से SDRF और NDRF की तैनाती की जाएगी।
10 से 16 नवंबर तक छठ जन-जागरूकता अभियान
जिलाधिकारी ने 10 से 16 नवंबर तक सघन छठ जन-जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
इस अभियान के तहत सरकारी कार्यालयों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और सार्वजनिक स्थलों पर छठ से संबंधित पोस्टर, बैनर और जागरूकता संदेश प्रदर्शित किए जाएंगे। प्रवेश मार्गों पर स्वागत द्वार बनाने की भी योजना है, ताकि बाहर से आने वाले लोगों को पर्व के दौरान बेहतर माहौल मिल सके।


