घाटशिला में ‘उड़ता पंजाब’ जैसी दस्तक: सीएम सोरेन के “नशा मुक्त झारखंड” के सपनों को अपनों ने ही लगाया बंटाधार

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

Advertisements
ad
Advertisements

चूकें नहीं! फटाफट पहले पाओ-पहले आओ: अमीर बनने के फेर में बेपरवाह हुए लॉटरी बाज।

ताम्र और यूरेनियम की वैश्विक पहचान वाली नगरी अब ड्रग्स, जुआ और साइबर क्राइम का बनता जा रहा है नया गढ़।

विशेष कवरेज: उमेश कांत गिरि, ब्यूरो प्रभारी, घाटशिला (झारखंड)

घाटशिला: अभी पिछले महीने 15 जून 2026 को ही झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची के प्रोजेक्ट भवन से 80 विशेष जागरूकता वाहनों को हरी झंडी दिखाकर “नशा मुक्त झारखंड” के एक व्यापक राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत की थी। सरकार ने नशीले पदार्थों की सटीक सूचना देने वालों के लिए ₹3 हजार से लेकर ₹3 लाख तक के नकद इनाम और नाम गुप्त रखने की घोषणा भी की।

लेकिन सूबे के मुखिया जहां राज्य को नशे के दलदल से निकालने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, वहीं घाटशिला अनुमंडल में उनके ही मातहत (पुलिस प्रशासन) इस मुहिम को पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। क्षेत्र में चर्चा आम है कि—”जब सावन ही आग लगाए, तो उसे कौन बुझाए?” और जब रक्षक ही आंखें मूंद लें, तो जनता किसके भरोसे रहे?

Advertisements
Advertisements
Advertisements

मुंगेरीलाल के हसीन सपने और ₹करोड़ों की अवैध लॉटरी
घाटशिला अनुमंडल के कई प्रमुख क्षेत्र जैसे मौउभंडार, गालूडीह, मुसाबनी, बड़ाजुड़ी, डुमरिया, भागा बांधी, जादूगोड़ा, राखा माइन्स, चाकुलिया और बहरागोड़ा अवैध लॉटरी विक्रेताओं के सुरक्षित ठिकाने बन चुके हैं।
लघु उद्योग का रूप: पहले जहां यह धंधा छिपकर एक-दो लोगों द्वारा किया जाता था, वहीं अब राजनीतिक रसूखदार सफेदपोशों और व्यापारियों के संरक्षण में यह एक संगठित लघु उद्योग का रूप ले चुका है।

बर्बादी का खेल: गरीब और मध्यम वर्ग के लोग खुली आंखों से लखपति-करोड़पति बनने के भ्रमजाल में अपनी गाढ़ी कमाई प्रतिदिन लुटा रहे हैं और अंततः ‘खाकपति’ बनकर तबाही के दलदल में धंस रहे हैं।

‘दम मारो दम’ की तर्ज पर बर्बाद होती युवा पीढ़ी
घाटशिला में ड्रग्स और गांजे का कारोबार पिछले कुछ महीनों में सुनामी की रफ्तार से बढ़ा है। भविष्य के पुरोधा (युवा पीढ़ी) अपने करियर से बेपरवाह होकर नशे के गुब्बार उड़ा रहे हैं।
बड़ा खुलासा (“M” टॉनिक का खेल): कुछ महीने पूर्व मौउभंडार ओपी चौकी से महज 500 मीटर की दूरी पर एक क्वार्टर से ड्रग्स का सेवन करते हुए 10 युवकों को रंगे हाथ पकड़ा गया था। लेकिन आरोप है कि ऊंची पहुंच, पैरवी और कथित तौर पर “M” (मनी) टॉनिक के दम पर 5 रसूखदारों को छोड़ दिया गया और सिर्फ 5 को जेल भेजकर खानापूर्ति कर दी गई। पुलिस की इसी ढुलमुल नीति के कारण राज स्टेट का राजबाड़ी, स्वर्ण रेखा नदी घाट पुल, मऊभंडार पुल के नीचे और अमाईनगर के सुनसान मकान नशेड़ियों के मुख्य अड्डे बन चुके हैं।

इस मामले में जिला परिषद सदस्य करण सिंह उर्फ टिंकू सहित क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने कई बार ठोस कार्रवाई की मांग की है, लेकिन स्थानीय पुलिसिया तंत्र ने जानबूझकर कुंभकर्णी नींद का चश्मा पहन रखा है।

जामताड़ा की राह पर घाटशिला: साइबर क्राइम का नया “चैंपियन”
कुछ समय पहले तक साइबर ठगी के लिए जामताड़ा और देवघर कुख्यात थे, लेकिन पिछले 6 महीनों में घाटशिला अनुमंडल इस अपराध के नए गढ़ के रूप में उभरा है।
ग्रामीणों के खातों का इस्तेमाल: युवाओं की एक बड़ी फौज गांव-देहात के भोले-भाले लोगों के बैंक खातों को किराए पर लेकर या झांसा देकर देशव्यापी ठगी को अंजाम दे रही है।
संदिग्ध भूमिका: हाल ही में पुलिस ने कुछ संदिग्ध साइबर अपराधियों को हिरासत में लिया था, लेकिन कथित तौर पर ‘नगद नारायण’ की कृपा और पैरवी के चलते उन्हें पूछताछ के नाम पर छोड़ दिया गया। इस सिंडिकेट में कुछ सफेदपोशों और बैंक कर्मियों की संलिप्तता की भी आशंका जताई जा रही है।

जनता में भारी आक्रोश: अब सीधे SSP से गुहार
अवैध बालू, अवैध शराब, ड्रग्स और लॉटरी के इस कॉकटेल से घाटशिला की शांतिप्रिय जनता में पुलिस प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों ने अब एकजुट होकर इस पूरे मामले की लिखित शिकायत एसएसपी (SSP) और ग्रामीण एसपी से करने का मन बनाया है।
बड़ा सवाल: क्या उच्च अधिकारी इस रिपोर्ट का संज्ञान लेकर घाटशिला को इस काले साम्राज्य से मुक्त कराने और मुख्यमंत्री के “नशा मुक्त झारखंड” के सपने को सच करने के लिए कोई ठोस इच्छाशक्ति दिखाएंगे? या फिर यह अवैध धंधा यूं ही फलते-फूलते अनुमंडल की पहचान को पूरी तरह बदल देगा?

Sandeepak Kumar
Author: Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

Advertisements