विमलकीर्ति सरोवर: जिसके सूत्र से जापान में बौद्ध धर्म की स्थापना हुई..वो तालाब उपेक्षा का शिकार

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बिहार के मुजफ्फरपुर जिले का गांव बनिया जिसका पौराणिक नाम बसाढ़ था, जिसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह गांव कभी वैशाली गणराज्य का मुख्य बाजार हुआ करता था। इसी गांव में आचार्य विमलकीर्ति पैदा हुए थे जिनके सूत्रों से जापान में बौद्ध धर्म राजधर्म के रूप में स्थापित हुआ।

इसी गांव में एक आयताकार तालाब है जिसका नाम बाद में बुद्ध के समकालीन आचार्य विमलकीर्ति के नाम पर रखा गया। स्थानीय ग्रामवासी इसे ‘बड़का पोखरी‘ के नाम से बुलाते हैं, बहुत ही बदहाल स्थितियों में है। जहां कभी बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर भव्य मेला लगता था। जानकार बताते हैं कि 1960 से 1980 तक बिहार पर्यटन की यह धुरी हुआ करता था। बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री बिहार केसरी श्री कृष्ण सिंह ने भी कई बार उस मेले में आकर उस उत्सव का मान बढ़ाया था।

लेकिन 1980 के बाद आचार्य विमलकीर्ति सरोवर पर होने वाला उत्सव भी समाप्त हो चुका है। उसके चारो तरफ बड़ी बड़ी झाड़ियां चादर की तरह बिछी हुई है। साफ सफाई का कोई ध्यान नहीं है। दुर्दशा का आलम यह है कि अतिक्रमण के कारण इस तालाब की डेमोग्राफी को ही बदल दिया है।

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अभी फिलहाल 2019 में कंबोडिया की राजकुमारी भी आई थीं। लेकिन तालाब के चारों तरफ की गंदगी को देखते हुए वो तत्काल ही चली गईं। राजद के शासनकाल  में ऊषा सिंह पर्यटनमंत्री थी तब उन्होंने इस तालाब का सूचीकरण कराया था। लेकिन आधा अधूरा ही काम हो पाया। इसके कारण तालाब बीच के कुछ सालों तक सुख चुका था।

सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इस तालाब को सौंदर्यीकरण की जरूरत है जिससे इस तालाब की भी गिनती विश्व पर्यटन मानचित्र पर हो। और यह तालाब भी पर्यटकों के घूमने और जानने की नजर में आए। अगर ऐसा होता है तो यहां के आस पास की आबादी के लिए रोजगार का साधन भी उपलब्ध होगा और गांव की शोभा भी बढ़ जाएगी

Sandeepak Kumar
Author: Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

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