

भारत का रूस-चीन के साथ बढ़ रहा नजदीकी अमेरिका के लिए बन रहा सिरदर्द
मार्कंडेय काटजू ने भारत में चल रहे आंदोलन के पीछे अमेरिकी सरकार की संभावित भूमिका को लेकर दावा किया है। जानिए BRICS, रूस-चीन से भारत के संबंधों और भारत-अमेरिका रिश्तों से जुड़ा पूरा मामला।
भारत में चल रहे जेन जी आंदोलनो को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू के एक बयान ने राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा को नया मुद्दा दे दिया है। काटजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भारत में जारी आंदोलन के पीछे अमेरिकी सरकार के भूमिका की आशंका जताई है और संभवतः गुप्त रूप से आंदोलन को आर्थिक मदद भी दी जा रही हो।
BRICS में भारत की बढ़ती सक्रियता को बताया वजह
मार्कंडेय काटजू ने अपने बयान में भारत की विदेश नीति और BRICS में उसकी बढ़ती भूमिका का संदर्भ दिया। उनका तर्क है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के रूस और चीन के साथ संबंध मजबूत होने से अमेरिका असहज हो सकता है।

आपको बता दें कि BRICS उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का एक अंतरराष्ट्रीय मंच है। भारत इसमें अपनी सक्रियता के जरिए व्यापार, विकास, वैश्विक शासन और विकासशील देशों के हितों से जुड़े मुद्दों को उठाता रहा है।



रूस और चीन के साथ भारत के संबंध चर्चा में?
भारत और रूस आपस में एक लंबे समय से रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्रों में एक दूसरे को सहयोग करते रहें हैं। वहीं, चीन के साथ सीमा विवाद और रणनीतिक चुनौतियों के बीच आर्थिक संबंधों में दूरियां कम हुई है।
भारत की विदेश नीति विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप अपना संबंध बनाए हुए है। रूस के साथ सहयोग और अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी इसी संतुलित दृष्टिकोण के अलग-अलग पहलू हैं।
भारत-अमेरिका संबंधों में मतभेद और सहयोग दोनों
भारत और अमेरिका के संबंधों में व्यापार, टैरिफ, ऊर्जा और रूस से तेल खरीद जैसे मुद्दों पर मतभेद सामने आते रहे हैं। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक, निवेश और रणनीतिक सहयोग भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। लेकिन सहयोग से ज्यादा अमेरिका अपनी दादागिरी चलाने की कोशिश जैसे हर देश पर करता रहा है। तो संभावना यह जताई जा सकती है कि भारत में भी इसी रणनीति के तहत वह आंदोलनकारियों के साथ गुप्त तरीके से सहयोग कर रहा हो।
क्या भारत की विदेश नीति से अमेरिका नाराज है?
काटजू के बयान का मूल तर्क यह है कि भारत का रूस और चीन के साथ सहयोग अमेरिका की नाराजगी का कारण बन सकता है। भारत अपने आर्थिक, सुरक्षा और कूटनीतिक हितों के आधार पर अलग-अलग देशों के साथ संबंध बनाए रखता है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में किसी देश की प्रतिक्रिया को केवल एक कारक के आधार पर समझना मुश्किल होता है।
बयान ने विदेश नीति पर बहस को दिया नया मुद्दा
मार्कंडेय काटजू के बयान ने भारत की विदेश नीति, BRICS में उसकी भूमिका और अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर बहस छेड़ने वाला मुद्दा सामने रखा है। फिलहाल इस बयान को एक पूर्व न्यायाधीश की व्यक्तिगत आशंका के रूप में देखना चाहिए, न कि किसी विदेशी हस्तक्षेप के प्रमाण के तौर पर।










