केंद्र सरकार के द्वारा 2025-26 के लिए बजट में आवंटित बड़ी योजनाओं पर 40 प्रतिशत राशि ही खर्च कर पाई है। किसानों के लिए सिंचाई परियोजन के तहत आवंटित 850 करोड़ रूपये में से मात्र 150 करोड़ रुपए ही खर्च कर पाई है। वही मनरेगा के लिए आवंटित राशि का 40 प्रतिशत ही पिछले 9 महीने में खर्च हुआ है।
2025-26 के बजट में शिक्षा और ग्रामीण सुधार की कुल 53 योजनाओं पर 5 लाख करोड़ खर्च का अनुमान था लेकिन अब तक मात्र 3.8 लाख करोड़ ही खर्च हुए हैं। यहां एक बात गौर करने का है कि दिसंबर 2025 तक 2 लाख करोड़ खर्च हुए थे। लेकिन उसके बाद के 35 दिनों में 1.8 लाख खर्च होना किसी बड़े घोटाले की ओर संकेत कर रहा है।
इन 53 योजनाओं में से 6 ऐसी योजनाएं है जिनमें से 6 योजनाओं का 10 प्रतिशत राशि ही खर्च हुआ है। 4 योजनाओं पर 40-50 फीसदी, 15 योजनाओं में 50 से 75 फीसदी के बीच और मात्र 10 ही ऐसी योजनाएं है जो अपने लक्ष्य को या तो पूरा कर चुकी हैं या काम खत्म होने के कगार पर हैं।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना, जल जीवन मिशन, पीएम इब्स सेवा, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, वॉटर मैनेजमेंट जैसे कई अन्य योजनाओं पर मात्र बजट का मात्र 40 फीसदी ही खर्च हुआ है। इन 53 योजनाओं में से 6 ऐसी योजनाएं हैं जिनपर बजट का मात्र 10 प्रतिशत राशि ही खर्च हुआ है।
जल जीवन मिशन के तहत अब तक लगभग 16 करोड़ घरों तक नल से जल पहुंचाने का प्रयास सफल रहा है। साथ ही जल की गुणवत्ता जांच के लिए 24 लाख 80 हजार महिलाओं को प्रशिक्षित भी किया गया है। इसके अलावा भू जल स्तर में वृद्धि के लिए अमृत सरोवर योजना के तहत देश भर में 69 हजार से अधिक सरोवरों का निर्माण कराया गया है।










