आवासों कि दुर्दशा का दंश, झारखंड के 30 परिवारों की बस्ती में शौचालय सुविधाएं तक मयस्सर नहीं, नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं “बिरहोर”
उमेश कांत गिरि. घाटशिला संवाददाता. झारखंड
झारखंड के घाटशिला प्रखंड की विकास योजनाओं में किस कदर बेखौफ दिनदहाड़े बिचौलियावाद हावी है, इसका जीता जागता नमूना घाटशिला प्रखंड से लगभग 15 किलोमीटर दूर बिरहोर बहुल गांव भादुआ में देखने को मिलता है। यहां वैसे तो कई बिरसा आवास बने हैं, लेकिन बिचौलियों के कारण इनकी हालत बद से बदहाल है।
बिरहोरों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास के आवंटन का लाभ तो मिला लेकिन बिचौलियों की कारगुजारियों के कारण आवास का कार्य कभी पूरा नहीं हुआ। भादुआ बस्ती के कुल 13 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास का आवंटन किया गया था, जिनमें से पांच आवास तो पूर्ण हो चुके हैं, लेकिन आठ आवास अभी भी आधे-अधूरे हालात में हैं। इन अधूरे पड़े आठ आवासो में केवल छत की ढलाई ही हुई है, लेकिन भीतर से प्लास्टर नदारद है, आवास के फ्लोर में भी प्लास्टर नहीं है, घरों में खिड़की दरवाजे तक नहीं लगे हैं।
कुछ लोगों ने जैसे तैसे मजबूरी वस हालात से समझौता करते हुए आवास में रहना भी शुरू कर दिया है। लेकिन बारिश होते ही सिर पर छाता लेकर आवास के अंदर रहना पड़ता है। क्यूंकि छते डली भी हैं फिर भी बारिश के समय छत से पानी रिस्ता रहता है। लोगों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हाईबन बिरहोर, चंचला बिरहोर, मास्टर बिरहोर, मंगल बिरहोर, रावण बिरहोर, रवि बिरहोर, चैती बिरहोर, लोकडे बिरहोर का आवास अभी भी सिस्टम की लापरवाही से आधा-अधूरा परा हुआ है।
लगभग 30 परिवारों के इस गांव में यहां पर एक भी शौचालय की सुविधा अब-तक उपलब्ध नहीं है. ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ केंद्र और राज्य सरकार सबर और बिरहोर के उत्थान के लिए कई सारी योजना बनाती है। वहीं इन योजनाओं को धरातल पर क्रियान्वित करते हुए अमल नहीं हो पाता है।
इन आवासों का निर्माण नरेन मुर्मू ने कराया है। ग्रामीणों ने बताया कि उनके बैंक खाते में 1.30 लाख रुपए की राशि मिली थी, जो उन्होंने नरेन मुर्मू को दे दिए। लेकिन इसके बावजूद आवास अभी भी अधूरे हैं। बार-बार पूछने पर निर्माण कार्य में घाटे की बात कह कर नरेन मुर्मू सरकारी आवंटन की बात कह आवास की बात को टरका देता है।
वहीं दूसरी ओर इस गांव में तीन और प्रधानमंत्री आवास बनाए गए हैं। जिन्हें गांव के ही माताल मानकी द्वारा बनाया गया जो कि पूरी तरह बनकर तैयार हो गया है। इन पूर्ण आवासों में तीन बिरहोर परिवारों ने रहना भी शुरू कर दिया है। बिचौलिए नरेन मुर्मू के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं होना कई नए संदेह को जन्म दे रहा है। बताया जाता है कि नरेन एक राष्ट्रीय पार्टी का कार्यकर्ता भी है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस 30 परिवारों की बस्ती में किसी भी घर में शौचालय तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस कारण यहां के पुरुष और महिला दोनों को मजबूरी बस झाड़ियों और खेतों मे जाना पड़ता है, जहां पर सांप, बिच्छू और जहरीले कीड़े मकोड़े आदि का हर वक्त भय बना रहता है।
बहरहाल, इन विलुप्त हो रहे आदिम जनजाति बिरहोरों के आश्रय पर बेखौफ डाका पड़ा है, और उनकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है। इस संबंध में भादवा पंचायत के मुखिया श्याम चरण मानकी ने बताया कि उन्हें भी इन अधूरे पड़े आवासो की जानकारी है। लेकिन इन आधे-अधूरे आवासो के निर्माणकर्ता नरेन मुरमू कहां पर है, इस बात कि जानकारी उन्हें बिल्कुल भी नहीं है।
फिलहाल यहां पर राष्ट्रपति के दत्तकपुत्र बिरहोर आदिवासी जनजाति के दुख दर्द का सुध लेने वाला कोई नहीं है. कम पढ़े लिखे होने और अपने अधिकारों की जानकारी न होने के कारण इनकी बात सरकार और अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती है।










