
बेंगलुरु: भारतीय क्रिकेट के पूर्व तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ की बेंगलुरु मेट्रो में सफर करते हुए एक तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। तस्वीर में श्रीनाथ हाथ में ट्रॉली बैग लिए मेट्रो के एक कोने में खड़े नजर आ रहे हैं। कानों में ईयरबड्स और सामान्य अंदाज में सफर करते श्रीनाथ को देखकर कई यूजर्स ने उनकी सादगी की तारीफ की।
भारत में जहां नेम-फेम मिलने के बाद लोगों की शैली और प्राथमिकता बदल जाती है। लोग अपने लेवल की सोसाइटी मेंटेन करने लगते हैं वही चार विश्वकप खेलने वाले तेज गेंदबाज का इस तरह का फोटो आना उनकी सादगी और शालीनता को दिखाता है।

सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर क्रिकेट प्रशंसकों के बीच उनके क्रिकेट करियर और व्यक्तित्व को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने उनके पुराने क्रिकेट प्रदर्शन पर सवाल उठाए, जबकि कई लोगों ने श्रीनाथ के योगदान को याद करते हुए उनका बचाव किया।
315 वनडे विकेट लेने वाले भारतीय तेज गेंदबाज
जवागल श्रीनाथ भारतीय क्रिकेट के प्रमुख तेज गेंदबाजों में शामिल रहे हैं। उन्होंने भारत के लिए 67 टेस्ट मैचों में 236 विकेट और 229 वनडे मैचों में 315 विकेट हासिल किए।
श्रीनाथ ने भारत की ओर से चार विश्व कप 1992, 1996, 1999 और 2003 में हिस्सा लिया। 2003 विश्व कप में उन्होंने 16 विकेट हासिल किए थे और भारतीय टीम फाइनल तक पहुंची थी।
वहीं वनडे क्रिकेट में 300 से अधिक विकेट लेने वाले वे भारत के पहले तेज गेंदबाज रहे। उनके करियर में तेज गति और लगातार गेंदबाजी उनकी प्रमुख पहचान रही। 2003 के फाइनल में उन्होंने अपने करियर की सबसे तेज गेंद 154 किलोमीटर/hour की रफ्तार से फेंकी। क्रिकेट प्रशंसकों के बीच उन्हें ‘मैसूर एक्सप्रेस’ के नाम से भी जाना जाता रहा है।
सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं
मेट्रो की तस्वीर सामने आने के बाद कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने श्रीनाथ की फील्डिंग और क्रिकेट से जुड़े पुराने प्रदर्शन को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणी की। वहीं, दूसरे यूजर्स ने इन टिप्पणियों का विरोध करते हुए कहा कि श्रीनाथ ने अपने दौर में भारतीय टीम के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
एक यूजर ने उनकी फील्डिंग को लेकर आलोचना की, जबकि दूसरे यूजर ने जवाब देते हुए कहा कि श्रीनाथ ने भारत को कई मुकाबलों में महत्वपूर्ण जीत दिलाई और उनके दौर में टीम की फील्डिंग से जुड़ी कमियों का भी असर पड़ता था।
इन प्रतिक्रियाओं से यह साफ है कि पूर्व क्रिकेटर को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की राय एक जैसी नहीं है। हालांकि, सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत राय को तथ्य या आधिकारिक आकलन मानना उचित नहीं है।
मैदान के बाहर भी जारी रहा क्रिकेट का सफ़र
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद श्रीनाथ क्रिकेट से पूरी तरह दूर नहीं हुए। उन्होंने कमेंट्री के अलावा ICC मैच रेफरी के रूप में भी काम किया। वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मैच रेफरी की भूमिका निभाते रहे हैं। उनका क्रिकेट प्रशासन से भी जुड़ाव रहा है। इसके अलावा वे क्रिकेट से संबंधित विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं।
पढ़ाई में भी रहे आगे
श्रीनाथ का शैक्षणिक जीवन भी उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने मैसूर के श्री जयचामराजेंद्र कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। क्रिकेट में करियर बनाने से पहले उनकी शिक्षा पर भी परिवार का विशेष जोर रहा। क्रिकेट में उनकी तेज गेंदबाजी ने उन्हें अलग पहचान दिलाई और वे धीरे-धीरे भारतीय टीम के प्रमुख तेज गेंदबाज बन गए।
अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित
भारतीय क्रिकेट में योगदान के लिए जवागल श्रीनाथ को 1999 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
मेट्रो में उनकी हालिया तस्वीर ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर उनके क्रिकेट करियर की यादें ताजा कर दी हैं। श्रीनाथ की नेटवर्ट अभी 20 करोड़ से 80 करोड़ के बीच बताई जा रही है, इसके बावजूद मेट्रो का सफर पूर्व क्रिकेट स्टार की सादगी के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।









