नेपाल की भीषण बाढ़ से भारत में हड़कंप, 105 भारतीय लापता; मुजफ्फरपुर में गंडक किनारे अलर्ट

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

Advertisements
ad

मुजफ्फरपुर/काठमांडू (खबर जिन्दगी): नेपाल के उत्तरी हिस्से में बुधवार, 26 अगस्त की सुबह आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। रसुवा, नुवाकोट और धादिंग सहित प्रभावित क्षेत्रों में तेज जलप्रवाह के कारण पुल, मकान और अन्य ढांचे क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसको लेकर भारत के नेपाल से जुड़े क्षेत्रों खासकर बिहार में हाई अलर्ट जारी किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कई लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं।

नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार प्रभावित क्षेत्र से 384 यात्री लापता बताए गए हैं। इनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। विदेशी नागरिकों में 105 भारतीयों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के कुछ जवानों के भी लापता होने की सूचना है।

मुजफ्फरपुर में प्रशासन अलर्ट

नेपाल में ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में अत्यधिक जलप्रवाह और संभावित GLOF की सूचना के बाद मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन ने भी तैयारियों की समीक्षा की है। जिलाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं।

प्रशासन के अनुसार नेपाल से आने वाली नदियों के जलप्रवाह में अगले 2-3 दिनों के दौरान अचानक वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी को देखते हुए गंडक नदी के किनारे स्थित इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई है।

मुजफ्फरपुर के साहेबगंज, सरैया और पारू प्रखंडों में संभावित प्रभाव को देखते हुए अधिकारियों को विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा औराई, कटरा और गायघाट सहित संवेदनशील क्षेत्रों में भी नदी के जलस्तर और निचले इलाकों पर नजर रखने को कहा गया है।

प्रशासन का तटबंधों पुल-पुलियों की निगरानी के निर्देश

जल संसाधन विभाग को फ्लैश फ्लड की आशंका को देखते हुए तटबंधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने संवेदनशील पुल-पुलियों, नदी किनारे के इलाकों और आवागमन वाले मार्गों की लगातार निगरानी करने को कहा है।

जरूरत पड़ने पर बांधों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। राहत की स्थिति में कम्युनिटी किचन, मेडिकल कैंप और पशु चारा शिविर जैसी व्यवस्थाएं सक्रिय रखने को कहा गया है।

लोगों से प्रशासन की अपील

जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी की धार, घाट, अस्थायी पुल, निचले और कटाव-प्रवण क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से न जाएं। नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने या तेज धारा दिखाई देने पर तत्काल ऊंचे और सुरक्षित स्थान की ओर जाने की सलाह दी गई है।

बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने को कहा गया है। पशुओं को भी निचले इलाकों में खुला नहीं छोड़ने की अपील की गई है।

अफवाहों से बचने की सलाह

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट संदेशों को आगे न बढ़ाएं।

नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि, तटबंध या सड़क में कटाव, पुल-पुलिया पर अत्यधिक पानी अथवा किसी अन्य असामान्य स्थिति की जानकारी मिलने पर स्थानीय प्रशासन या जिला आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचना देने की अपील की गई है।

जिला आपदा नियंत्रण कक्ष: 8544010249 / 0621-2212007

प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी संभावित आपदा से निपटने के लिए संबंधित विभागों को मिशन मोड में काम करने के निर्देश दिए गए हैं। नागरिकों से अपील है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन नदी और निचले इलाकों को लेकर पूरी सावधानी बरतें।

तिब्बत से जुड़ा हो सकता है बाढ़ का मामला?

इस बाढ़ को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि भोटेकोशी नदी में सीमा पार के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र से अचानक पानी बढ़ा। स्थानीय स्तर पर अत्यधिक बारिश की स्पष्ट जानकारी नहीं होने के कारण ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF जैसी संभावना पर भी चर्चा हो रही है। हालांकि घटना के वास्तविक कारण की पुष्टि संबंधित एजेंसियों की जांच और आधिकारिक आकलन के बाद ही होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

Advertisements