
नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्र आंदोलन एक बार फिर चर्चा में है। कॉकरोच जनता पार्टी ने एक बार फिर दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है। सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाकर सीजेपी 5 सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने जा रही है। लेकिन इस बार मार्च जंतर मंतर से शुरू न होकर इंडिया गेट से शुरू होगा और दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जायेगा।
सीजेपी की सोमवार को कार्यसमिति की ऑनलाइन बैठक बुलाई गई थी। बैठक के बाद पार्टी की ओर से दिए गए बयान में बताया गया कि बैठक में केंद्र सरकार और भाजपा और भाजपा समर्थित एनडीए शासित राज्यों की ओर से किए गए वादों की समीक्षा की गई, जिनके आधार पर राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन को वापस लिया गया था।
सीजेपी की ओर से जारी लिखित बयान में कहा गया है कि ‘राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन को वापस लिए एक महीना हो चुका है। सरकारों ने वादों को पूरा करने के बजाय सिर्फ देरी की और सुप्रीम कोर्ट के सामने भी वादों पर भरोसा नहीं दिया। समिति के सदस्यों ने सरकार की मंशा पर आशंका जाहिर की। ‘सीजेपी की तरफ से कहा गया कि सरकार की यह नीति जारी नहीं रह सकता है। हमारे धैर्य को कमजोरी ना समझा जाए। हमारी सद्भावना सरकार के लिए धोखा देने का मौका नहीं हो सकती है। राष्ट्रीय कार्य समिति 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च का आह्वान किया है।‘
सीजेपी की तीन प्रमुख मांगें
सीजेपी के मुताबिक, नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी गई थीं। इनमें सबसे प्रमुख मांग तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी।
संगठन का कहना है कि इस मांग के पूरा होने के बाद आंदोलन वापस ले लिया गया था। हालांकि, सीजेपी के अनुसार दो अन्य मांगों को लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।
कॉकरोच जनता पार्टी ने कहा कि सरकार ने पीड़ित परिवारों को मुआवजे और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों पर अब तक संज्ञान नहीं लिया है। सीजेपी ने नीट पेपर लीक से प्रभावित होकर आत्महत्या करने वालों के परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की थी। कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ से यह दावा किया गया है कि सरकार की ओर से पीड़ित परिवारों को भरोसा दिया गया था, लेकिन अब तक मांग पूरी नहीं हुई है।
प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों का मामला
सीजेपी की दूसरी लंबित मांग आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने से जुड़ी है। CJP का कहना है कि आंदोलन समाप्त कराने के दौरान सरकार की ओर से इन मामलों को लेकर भरोसा दिया गया था, लेकिन मुकदमों को लेकर सरकार की तरफ से अभी तक कोई स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
पुलिस के दावे पर भी उठे सवाल
आंदोलन में कथित तौर पर बड़ी संख्या में दोषसिद्ध अपराधियों के शामिल होने का पुलिस दावा सामने आने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति को अपराधी बताने से पहले उसके खिलाफ अंतिम न्यायिक निर्णय और संबंधित मामले की स्थिति की पुष्टि आवश्यक है। छात्र आंदोलन, पुलिस के आरोप और सरकार से जुड़ी लंबित मांगों के बीच अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या संबंधित पक्ष अपने दावों के समर्थन में आधिकारिक दस्तावेज और रिकॉर्ड सार्वजनिक करते हैं?
फिलहाल, सीजेपी की ओर से उठाई गई मांगों और पुलिस के दावे को अलग-अलग देखा जाना जरूरी है। किसी भी पक्ष के आरोप को अंतिम सत्य मानने से पहले आधिकारिक पुष्टि और न्यायिक रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।
बहरहाल सीजेपी ने आंदोलन से जुड़े अपने पुराने मुद्दों को फिर सामने रखा है। कॉकरोच जनता पार्टी का आरोप है कि सरकार के सामने रखी गई प्रमुख मांगों पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। जिसके बाद आज की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आगामी 5 सितंबर को संगठन इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च निकालेगी।









