व्हाइट हाउस में CNN,MSNOW, Politico टीवी चैनल के कवरेज पर रोक; ट्रंप प्रशासन के खिलाफ  कोर्ट पहुंचे पत्रकार

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“ट्रंप टीवी” के नाम से लॉन्च हुआ 24×7 व्हाइट हाउस का नया चैनल

वॉशिंगटन: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और मीडिया के बीच का टकराव अब अदालत की चौखट तक पहुंच चुका है। CNN, MS NOW और Politico टीवी चैनल ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को संयुक्त रूप से ट्रंप प्रशासन के खिलाफ संघीय अदालत में मुकदमा दायर करते हुए व्हाइट हाउस से पत्रकारों की पहुंच रोके जाने को चुनौती दी। तीनों संस्थानों का आरोप है कि उनकी रिपोर्टिंग से असहमति के कारण उनके पत्रकारों के प्रेस क्रेडेंशियल रद्द किए गए और उन्हें व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश से रोका गया।

व्हाइट हाउस से कवरेज करने पर रोक?

विवाद की जड़ ट्रंप प्रशासन का वह फैसला है, जिसके तहत CNN, MS NOW और Politico के पत्रकारों को व्हाइट हाउस से कवरेज करने से रोक दिया गया। व्हाइट हाउस से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि संबंधित पत्रकारों के प्रवेश बैज निष्क्रिय कर दिए गए और उन्हें परिसर में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है। यहीं से यह मामला ट्रंप प्रशासन का संवैधानिक अधिकारों पर हमले के रूप में देखा जा रहा है।

तीनों मीडिया संस्थानों का कहना है कि सरकार किसी खबर की सामग्री या किसी मीडिया संस्थान के दृष्टिकोण से असहमति के आधार पर प्रेस की पहुंच रोक नहीं सकती। मुकदमे में प्रथम संशोधन के साथ-साथ उचित प्रक्रिया से जुड़े अधिकारों का भी हवाला दिया गया है।

ट्रंप प्रशासन खबरों को बता रहा ‘फेक न्यूज’

राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रतिबंध का बचाव करते हुए कहा है कि कार्रवाई स्वतंत्र प्रेस के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके शब्दों में “FAKE NEWS” के खिलाफ है। प्रशासन का कहना है कि व्हाइट हाउस तक पहुंच कोई पूर्ण अधिकार नहीं बल्कि विशेषाधिकार है। ऐसे में कानूनी लड़ाई का मुख्य सवाल यह है कि क्या सरकार किसी पत्रकार या मीडिया संस्थान की रिपोर्टिंग से असहमति को उसकी सरकारी परिसर तक पहुंच सीमित करने का आधार बना सकती है। यही प्रश्न अब अदालत के सामने है।

CNN का पूल कवरेज से रोक का असर टीवी नेटवर्क पर

विवाद का असर केवल तीन संस्थानों तक सीमित नहीं रहा। CNN व्हाइट हाउस के उन पांच प्रमुख टीवी नेटवर्कों में शामिल है जो राष्ट्रपति की पूल कवरेज साझा करते हैं। सोमवार को CNN को राष्ट्रपति की टीवी पूल ड्यूटी से भी हटाया गया। इसके बाद ABC, CBS, NBC और Fox News से जुड़े पूल कवरेज पर भी बड़ा असर पड़ा। इससे राष्ट्रपति की सार्वजनिक गतिविधियों की साझा टीवी कवरेज पर भी असर पड़ेगा।

प्रेस की स्वतंत्रता और राष्ट्रपति की सुरक्षा बना मुद्दा

CNN, MS NOW और Politico ने अदालत से प्रतिबंध रोकने और अपने पत्रकारों की व्हाइट हाउस पहुंच बहाल करने की मांग की है। मुकदमे में उनका तर्क है कि बिना पर्याप्त प्रक्रिया के प्रेस क्रेडेंशियल रद्द करना और रिपोर्टिंग से असहमति को आधार बनाना प्रथम संशोधन से जुड़े अधिकारों का उल्लंघन है। वहीं ट्रंप प्रशासन का पक्ष है कि व्हाइट हाउस को यह तय करने का अधिकार है कि उसके परिसर में किस मीडिया हाउस को एक्सेस दिया जाए। अब असली फैसला अदालत में होना है कि मीडिया को किस स्तर तक पत्रकारिता करना चाहिए।

भारत में पत्रकारिता और सरकार

वरिष्ठ पत्रकार संजय कटियार ने पत्रकारों पर अमेरिका में लगाये गए प्रतिबंधों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे व्यक्ति की स्वच्छ अभिव्यक्ति की आजादी को चुप करना बताया है। उनका कहना है कि अगर सरकार को यह लगता है कि पत्रकारिता में अगर कोई फेक न्यूज चल रहा है तो सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए।

भारत के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर सरकार से जुड़ी सामग्री को “फर्जी या भ्रामक” बताने और उसे हटवाने का अधिकार के लिए लाए गए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) संशोधन (2023) को बॉम्बे हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। इसके साथ ही बिल के तहत सोशल मीडिया पर देख रेख के लिए बनाई गई केंद्रीय तथ्य जांच इकाई के गठन को भी निरस्त कर दिया था।

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