मुजफ्फरपुर: भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में गूंजा ‘वन्दे मातरम्’, 125 प्रशिक्षुओं ने किया सामूहिक गायन

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मुजफ्फरपुर के सदातपुर स्थित भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर सुबह 11 बजे सामूहिक गायन हुआ, जिसमें करीब 125 प्रशिक्षुओं ने भाग लिया।

मुजफ्फरपुर/खबर जिन्दगी: ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 25 सितंबर शुक्रवार को देशभर के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में निर्धारित समय पर सामूहिक गायन का आयोजन किया गया। इसी क्रम में मुजफ्फरपुर के सदातपुर स्थित भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में भी सुबह 11 बजे ‘वन्दे मातरम्’ का सामूहिक गान हुआ। इस अवसर पर 125 प्रशिक्षुओं ने इसका सामूहिक गायन किया।

भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के वंदना सभागार में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत प्राचार्य डॉ. राकेश कुमार पाल द्वारा भारत माता के पूजन एवं वंदन से हुई। इसके बाद निर्धारित समय सुबह 11 बजे प्रशिक्षुओं, प्राध्यापकों और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से ‘वन्दे मातरम्’ का गायन किया।

प्रशिक्षुओं ने किया सामूहिक गायन

महाविद्यालय के अनुसार कार्यक्रम में B.Ed. प्रथम वर्ष, B.Ed. द्वितीय वर्ष और D.El.Ed. द्वितीय वर्ष के करीब 125 प्रशिक्षुओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

सामूहिक गायन के दौरान पूरा सभागार ‘वन्दे मातरम्’ के स्वर से गूंज उठा। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशिक्षुओं को गीत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराने के साथ राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता से जुड़े मूल्यों पर चर्चा करना था। आपको बता दें कि कार्यक्रम का आयोजन शिक्षा मंत्रालय एवं विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के आह्वान के क्रम में किया गया।

प्राचार्य ने बताया ‘वन्दे मातरम्’ का ऐतिहासिक महत्व

सामूहिक गायन के बाद प्राचार्य डॉ. राकेश कुमार पाल ने प्रशिक्षुओं को ‘वन्दे मातरम्’ के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह गीत मातृभूमि के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति के रूप में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महत्वपूर्ण रहा।

आपको बता दें कि 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इसकी रचना की थी। 1882 में इसे आनंदमठ उपन्यास में  शामिल किया गया था। भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में यह ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ क्रांति का प्रतीक बन गया था। आजादी के बाद 24 जनवरी 1950 को आधिकारिक रूप से भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया।

प्रशिक्षणार्थियों की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षुओं ने सामूहिक रूप से गायन में भाग लिया। आयोजकों के मुताबिक भारत माता के पूजन एवं वंदन से शुरू हुआ कार्यक्रम सामूहिक गायन के साथ संपन्न हुआ। आयोजन के माध्यम से शैक्षणिक परिसर में राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता से जुड़े मूल्यों पर जोर दिया गया।

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