
DGP के पद से विनय कुमार ने ली है स्वास्थ्य को लेकर स्वैक्षिक सेवानिवृत्ति
बिहार के पूर्व DGP विनय कुमार VRS के बाद मुख्य सूचना आयुक्त बने हैं। जानिए उनकी नियुक्ति के प्रक्रिया की वजह, और RTI आयोग के सामने हजारों मामलों को निपटाना प्रमुख चुनौती है।
पटना: बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने सेवानिवृत्ति से पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर उन्होंने यह सेवानिवृत्ति सरकार से मांगी थी जिसे मंजूर कर लिया, इसके साथ ही बिहार सरकार ने उन्हें राज्य का नया मुख्य सूचना आयुक्त (Chief Information Commissioner) नियुक्त किया है। बिहार के राज्यपाल के आदेश से गृह विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने यह अधिसूचना जारी की।
गृह विभाग की अधिसूचना के अनुसार, 25 सितंबर 2026 को दिए गए VRS आवेदन को तत्काल प्रभाव से मंजूर किया गया और तीन महीने के नोटिस से जुड़ी शर्त में भी छूट दी गई। विनय कुमार दिसंबर 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले थे। ऐसे में निर्धारित कार्यकाल पूरा होने से कुछ महीने पहले पुलिस सेवा से बाहर निकलकर सूचना आयोग की जिम्मेदारी संभालना प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
मुख्य सूचना आयुक्त के लिए विनय कुमार का चयन क्यों?
मुख्य सूचना आयुक्त के चयन के पीछे सरकार की ओर से किसी एक विशेष कारण को सार्वजनिक रूप से नियुक्ति की वजह के तौर पर नहीं बताया गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर उनके चयन को उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव और शासन व्यवस्था की समझ से जोड़कर देखा जा सकता है।
विनय कुमार 1991 बैच के IPS अधिकारी रहे हैं और बिहार पुलिस के शीर्ष पद यानी DGP की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। RTI व्यवस्था में सरकारी विभागों, अधिकारियों और रिकॉर्ड-आधारित सूचनाओं से जुड़े विवादों की सुनवाई होती है। इसलिए प्रशासनिक तंत्र के कामकाज की जानकारी इस पद की जिम्मेदारी निभाने में उपयोगी हो सकती है।
चयन प्रक्रिया में सरकार और विपक्ष की मौजूदगी
विनय कुमार के नाम पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता वाली चयन समिति की बैठक में सहमति बनने की जानकारी सामने आई थी। बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी शामिल थे। इसके बाद नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। क्योंकि मुख्य सूचना आयुक्त का पद सरकारी रिकॉर्ड और नागरिकों के सूचना के अधिकार से सीधे जुड़ा है। इसलिए चयन समिति में सत्ता पक्ष और विपक्ष द्वारा इनके नाम पर सहमति नियुक्ति की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
सबसे बड़ी चुनौती: RTI मामलों का दबाव
नई जिम्मेदारी संभालते ही विनय कुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सूचना आयोग में लंबित मामलों का निपटारा हो सकती है। आयोग की रिपोर्टों में बिहार सूचना आयोग में बड़ी संख्या में मामले लंबित होने की बात सामने आई है। दूसरी ओर आयोग की वेबसाइट पर नियमित रूप से साप्ताहिक Cause List जारी हो रही है, जिससे लगातार मामलों की सुनवाई होने का पता चलता है। ऐसे में नए मुख्य सूचना आयुक्त के सामने पुराने मामलों के बैकलॉग को कम करने की चुनौती भी होगी।
RTI में आयोग की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण?
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत राज्य सूचना आयोग नागरिकों की शिकायतों और द्वितीय अपीलों की सुनवाई करता है। यदि किसी व्यक्ति को लोक सूचना अधिकारी से सूचना प्राप्त करने में परेशानी होती है, आवेदन स्वीकार नहीं किया जाता, निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलता या उपलब्ध कराई गई सूचना को लेकर शिकायत होती है, तो कानून के तहत राज्य सूचना आयोग के समक्ष शिकायत की जाती है। इसके बाद आयोग संबंधित अधिकारियों को बुला सकता है और आवश्यक दस्तावेजों की जांच कर सकता है।
अधिकारियों की जवाबदेही तय करना
RTI अधिनियम की धारा 20 के तहत कुछ परिस्थितियों में लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाया जा सकता है। कानून के अनुसार यह जुर्माना ₹250 प्रतिदिन की दर से अधिकतम ₹25,000 तक हो सकता है। गंभीर मामलों में विभागीय कार्रवाई की सिफारिश भी की जा सकती है।
नियुक्ति के साथ ही उठने लगे सवाल
विनय कुमार की नियुक्ति के बाद सबसे अहम सवाल यह होगा कि स्वास्थ्य कारणों से लिया गया स्वैक्षिक सेवानिवृत्ति सूचना आयोग के लंबित मामलों के निपटारे में तेजी ला पाएगा।
इसके अलावा लंबित मामलों का दबाव, सरकारी विभागों से रिकॉर्ड मंगाने में होने वाली देरी, पुराने मामलों का निपटारा और सूचना अधिकारियों की जवाबदेही तय करना नई व्यवस्था के सामने प्रमुख प्रशासनिक चुनौतियां रहेंगी।
VRS से मुख्य सूचना आयुक्त तक का प्रशासनिक बदलाव
विनय कुमार के लिए यह नियुक्ति उनके लंबे पुलिस करियर के बाद एक बिल्कुल अलग संस्थागत भूमिका की शुरुआत है। VRS के बाद मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब वास्तविक परीक्षा आयोग के कामकाज में दिखाई देगी।
इसके अलावा लंबित मामलों के निपटारे की गति, RTI आवेदकों की शिकायतों पर सुनवाई, सरकारी विभागों की जवाबदेही और आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता जैसी अनेक मामलों पर उनकी नई भूमिका कैसी होगी यह आने वाले वक्त में पता चलेगा।










