
शोध, समाज एवं राष्ट्र के विकास का माध्यम बने: कुलाधिपति प्रभाकर सिंह
शोध कौशल, नवाचार और अकादमिक दक्षता पर विशेषज्ञ ने किया मार्गदर्शन
सोना देवी विश्वविद्यालय घाटशिला में Research Workshop का आयोजन हुआ। शोधार्थियों को शोध कौशल, नवाचार, अकादमिक लेखन और आधुनिक शोध-पद्धतियों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिला।
उमेश कांत गिरी, ब्यूरो प्रमुख. घाटशिला. झारखंड
घाटशिला. झारखंड: सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के शोध कौशल, अकादमिक दक्षता और नवाचार क्षमता को विकसित करने के उद्देश्य से विशेष Research Workshop का आयोजन किया गया। कार्यशाला में आधुनिक शोध-पद्धतियों, डिजिटल संसाधनों, अकादमिक लेखन, शोध की गुणवत्ता और शोध को सामाजिक उपयोगिता से जोड़ने जैसे विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन दिया गया।

शोध उपाधि तक सीमित नहीं : डॉ. शिवचन्द्र झा
कार्यक्रम का शुभारंभ राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शिवचन्द्र झा ने किया। उन्होंने कार्यशाला का उद्देश्य शोध केवल उपाधि प्राप्त करने की औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नए ज्ञान के सृजन, स्थापित धारणाओं के विश्लेषण और सामाजिक समस्याओं को समझने का माध्यम है। उन्होंने डिजिटल युग में ऑनलाइन जर्नल, शोध डेटाबेस और आधुनिक तकनीकी संसाधनों के बढ़ते महत्व का उल्लेख करते हुए शोधार्थियों के लिए डिजिटल दक्षता को भी आवश्यक बताया।
Research Skills और Innovation पर विशेषज्ञ का मार्गदर्शन
कार्यशाला के विशेषज्ञ प्रवीण कुमार महतो, Faculty Member, Research and HPC Division, JCERT ने शोधार्थियों को Research Skills, Research Competency और Innovation से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
उन्होंने शोध विषय के चयन, शोध समस्या की पहचान, शोध उद्देश्यों के निर्धारण, साहित्य समीक्षा, आंकड़ों एवं तथ्यों के विश्लेषण, निष्कर्ष और शोध लेखन से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की।

शोध एवं नवाचार विश्वविद्यालय की प्राथमिकता : कुलसचिव डॉ. नीत नयना
कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान की प्रगति में शोध और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि सोना देवी विश्वविद्यालय शोधार्थियों को ऐसा अकादमिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है, जहां वे स्वतंत्र चिंतन और नए विचारों के साथ अपने शोध को आगे बढ़ा सकें।
गुणवत्तापूर्ण शोध से मजबूत होती है अकादमिक पहचान : कुलपति
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने कहा कि उच्च शिक्षा में शोध और नवाचार का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की भूमिका केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों और शोधार्थियों में स्वतंत्र चिंतन, विश्लेषणात्मक क्षमता और नवाचार की भावना विकसित करना भी उसका महत्वपूर्ण दायित्व है।

“शोध समाज और राष्ट्र के विकास का माध्यम बने”: कुलाधिपति प्रभाकर सिंह
कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शोध देश की बौद्धिक और ज्ञान-सम्पदा को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने शोध में मौलिकता, गुणवत्ता, अनुशासन, नवाचार और सामाजिक सरोकार को महत्व देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि शोधार्थियों को अपने ज्ञान को समाज के व्यापक हित से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। सामाजिक समस्याओं की समझ और उनके संभावित समाधान की दिशा में किया गया शोध व्यापक उपयोगिता रख सकता है।
कुलाधिपति ने युवा शोधार्थियों को “सीखें, प्रश्न करें, विश्लेषण करें और नए ज्ञान का सृजन करें” की भावना के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने शोध में निरंतरता, धैर्य और परिश्रम को महत्वपूर्ण बताया।

शोधार्थियों में दिखा उत्साह
कार्यशाला में विभिन्न विभागों के शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की। प्रतिभागियों ने शोध प्रक्रिया, अकादमिक लेखन, नवाचार और आधुनिक तकनीकी संसाधनों से जुड़े सवाल पूछे।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. कंचन सिन्हा ने विशेषज्ञ प्रवीण कुमार महतो, कुलाधिपति प्रभाकर सिंह, कुलपति प्रोफेसर डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा, कुलसचिव डॉ. नीत नयना, विश्वविद्यालय के शिक्षकों और सभी शोधार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।










