बेगूसराय: सहायक आयुक्त ने 25 हजार के लिए बेची अपनी जमीर; SUV ने रिश्वत लेते रंगे हाथों किया गिरफ्तार

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बेगूसराय सहायक आयुक्त (असिस्टेंट कमिश्नर) की रिश्वत को लेकर डाटा एंट्री ऑपरेटर करता था लाइजनर का काम

बेगूसराय: बिहार सरकार के कई अफसरों पर हाल के दिनों में भ्रष्टाचार को लेकर ED और सीबीआई का छापा पड़ा है। इसके अलावा रिश्वत लेने के मामले में कई अधिकारी निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के हत्थे चढ़े हैं। ऐसा लगता है कि इन अफसरों ने अपनी जमीर बेच दी है। हालिया मामला बेगूसराय का है जहां के सहायक आयुक्त (राज्यकर) और डाटा एंट्री ऑपरेटर को SUV ने मंगलवार को 25 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हांथों गिरफ्तार किया है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने बेगूसराय में राज्यकर विभाग के एक सहायक आयुक्त और डाटा एंट्री ऑपरेटर को 25 हजार रूपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 6 अक्टूबर मंगलवार को सहायक आयुक्त, राज्यकर, बेगूसराय अंचल के कार्यालय में की गई।

रिश्वत मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रकाश चन्द्र मोहन, सहायक आयुक्त, राज्यकर, बेगूसराय अंचल और संतोष कुमार झा, डाटा एंट्री ऑपरेटर, सहायक आयुक्त कार्यालय, बेगूसराय के रूप में हुई है।

रिश्वत मांगने की वजह

बेगूसराय के भगवानपुर के रूदौली निवासी ज्योति कुमार, शहर के विश्वनाथ नगर के कृष्णा मार्केट में ‘रोजी गारमेंट्स’ नाम से कपड़े की दुकान चलाते हैं। ज्योति कुमार का कहना था कि वे समय पर GST का भुगतान करते हैं, इसके बावजूद असिस्टेंट कमिश्नर प्रकाश चन्द्र मोहन के कार्यालय से उन्हें 3.84 लाख रुपये बकाए का नोटिस भेजा गया। इस मामले को रफा-दफा करने के एवज में डाटा ऑपरेटर ने 50,000 रुपये की रिश्वत मांगी, जो फाइनली 25,000 रुपये में तय हुआ।

ज्योति ने बताया कि संबंधित मामले में नोटिस का जवाब देने और इनके द्वारा निपटारा किए जाने के बावजूद लगातार तीन नोटिस भेजे गए और कड़ी कार्रवाई का दबाव बनाकर मामला समाप्त करने के बदले रिश्वत की मांग की जा रही थी। इसी को लेकर ज्योति ने निगरानी में प्रकाश चन्द्र मोहन, सहायक आयुक्त, राज्यकर, बेगूसराय अंचल और संतोष कुमार झा, डाटा एंट्री ऑपरेटर, सहायक आयुक्त कार्यालय, बेगूसराय के खिलाफ शिकायत की थी।

निगरानी ने किया शिकायत के सत्यापन

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने शिकायत का सत्यापन कराया। ब्यूरो के अनुसार सत्यापन के दौरान रिश्वत की मांग किए जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद निगरानी थाना कांड संख्या 116/26, दिनांक 5 अक्टूबर 2026 दर्ज किया गया।

अनुसंधानकर्ता पुलिस निरीक्षक सुभाष स्वामी के अनुरोध पर पुलिस उपाधीक्षक सतीश चन्द्र माधव के नेतृत्व में धावादल का गठन किया गया। टीम ने निर्धारित कार्रवाई के दौरान दोनों आरोपियों को 25 हजार रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

विशेष न्यायालय में आरोपी के पेशी की तैयारी

निगरानी ब्यूरो के अनुसार गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पूछताछ पूरी होने के बाद उन्हें विशेष न्यायालय, निगरानी, भागलपुर में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा मामले में आगे की अनुसंधानात्मक कार्रवाई जारी है।

2026 में निगरानी ब्यूरो की उपलब्धि

ब्यूरो द्वारा  जारी की गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में यह 116वीं प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई है। इसके अलावा एक कांड जिला से स्थानांतरित किया गया है। इस तरह कुल 117 कांड ब्यूरो द्वारा अनुसंधानित किए जा रहे हैं।

निगरानी ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार बेगूसराय का रिश्वत कांड वर्ष 2026 में ट्रैप से संबंधित 106वां कांड है। इन मामलों में अब तक कुल 107 अभियुक्तों को कथित रूप से रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया जा चुका है।

बिहार में कई ऐसे मामले हैं जिसमें लोग शिकायत भी नहीं करते। इसे सिस्टम का हिस्सा मान संबंधित कार्यालय में टेबल दर टेबल घूमने से बचने के लिए भी रिश्वत का चढ़ावा चढ़ाते हैं। लोगों का कहना है कि बिहार में सरकार से संबंधित किसी भी विभाग में बिना चढ़ावा कोई काम नहीं होता।

बहरहाल लोगों को अब यह लगने लगा है कि बिहार में कोई भी कार्य कराना हो तो बिना रिश्वत दिए कार्य होने की संभावना खत्म सी हो है। लोगों का यह भी कहना है कि सरकार को अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन बढ़ा देना चाहिए जिससे यह रिश्वत की मांग नहीं कर सके।

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