बिहार में अंचल अधिकारियों पर कार्रवाई तेज; कुढ़नी के पूर्व CO पर लगा गंभीर आरोप

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कुढ़नी के पूर्व अंचल अधिकारी अनिल कुमार संतोषी तबादले के बाद भी कर रहे थे दाखिल-खारिज

मुजफ्फरपुर/खबर जिन्दगी: बिहार में जमीन से जुड़े मामलों को लेकर एक-एक कर के कई राजस्व अधिकारियों पर गाज गिर रही है। ताजा मामला मुजफ्फरपुर के कुढ़नी के पूर्व अंचल अधिकारी अनिल कुमार संतोषी पर कार्रवाई को लेकर है।

समाहर्ता-सह-जिलाधिकारी, मुजफ्फरपुर द्वारा कुढ़नी के पूर्व अंचल अधिकारी अनिल कुमार संतोषी के विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर सरकार को भेजा गया है। साथ ही इनके विरूद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। इन पर आरोप है कि स्थानांतरण के बाद भी ये दाखिल-खारिज वादों का निष्पादन कर रहे थे। आरोप जांच में प्रमाणित पाए जाने के बाद आरोपपत्र गठित कर सरकार को भेजा गया है।

कुढ़नी के पूर्व CO पर कार्रवाई की अनुशंसा

मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी के अनुसार, अनिल कुमार संतोषी 7 फरवरी 2024 से 4 जुलाई 2026 तक कुढ़नी अंचल अधिकारी के पद पर तैनात थे। वर्तमान में उनका पदस्थापन पूर्वी चंपारण के मोतिहारी स्थित बंदोबस्त कार्यालय में सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी के रूप में है।

आरोप है कि कुढ़नी से स्थानांतरण होने के बाद भी उन्होंने वहां दाखिल-खारिज के मामलों का निष्पादन किया। इस मामले की जांच अपर समाहर्ता, मुजफ्फरपुर से कराई गई। जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करने की अनुशंसा भूमि सुधार विभाग, बिहार सरकार को भेजा गया है।

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तबादले के बाद पुराने जगह पर काम करना कितना गंभीर ?

स्थानांतरण के बाद किसी अधिकारी द्वारा पुराने पद से संबंधित मामलों का निष्पादन किए जाने का आरोप प्रशासनिक अधिकार-क्षेत्र और प्रक्रिया के अनुपालन से जुड़ा गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि आदेश किस अधिकार के तहत पारित किए गए। संबंधित अधिकारी के पास वैधानिक अनुमति थी या नहीं और निर्णयों का अभिलेखों पर क्या प्रभाव पड़ा।

कुढ़नी मामले में जांच के दौरान आरोप प्रमाणित पाए जाने की बात जिलाधिकारी ने कही है। हालांकि, अंतिम विभागीय दंड और उसके स्वरूप की जानकारी संबंधित विभाग के अंतिम आदेश से ही स्पष्ट होगी।

मुशहरी में जमीन के कथित फर्जीवाड़े का मामला

इसके पहले मुजफ्फरपुर के मुशहरी अंचल के तत्कालीन अंचल अधिकारी महेंद्र कुमार शुक्ला से जुड़ा मामला भी चर्चा में रहा है। जानकारी के अनुसार, इनके द्वारा लगभग 70 डिसमिल खातियानी और पुश्तैनी जमीन (कीमत लगभग 15 करोड़ रुपये की जमीन) को कथित तौर पर फर्जी केवाला और दाखिल-खारिज करने का आरोप है।

इस मामले में शुक्ला को पहले निलंबित किया गया और उसके बाद पुलिस द्वारा उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया  गया है। इसमें जमीन के दस्तावेजों के सत्यापन, दाखिल-खारिज की प्रक्रिया और संबंधित राजस्व कर्मचारी और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की प्रक्रिया चल रही है।

बिहार के किशनगंज और कटिहार जिले में भी कार्रवाई

इसके अलावा राज्य के अन्य जिलों में भी राजस्व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। इसमें किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड के तत्कालीन CO ओम प्रकाश भगत के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने का आदेश और दो वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई की गई है।

इसमें दूसरा नाम बरारी प्रखंड के CO ललन कुमार मंडल का है। इनके ऊपर आरोप यह है कि इन्होंने सरकारी आदेश पर लापरवाही बरती है। विभागीय कार्रवाई के अनुसार, जमीन से समय पर अतिक्रमण नहीं हटाने के आरोप में इनके ऊपर आरोपपत्र गठित करने का निर्देश दिया गया है।

कटिहार के मनसाही प्रखंड के तत्कालीन CO महेश प्रसाद सिंह पर भी लगभग कुढ़नी CO जैसा ही आरोप है। ख़बरों के अनुसार, इनके द्वारा भूमि सुधार उपसमाहर्ता के आदेश के विपरीत दाखिल-खारिज और लंबित मामलों को मंजूरी देने के आरोप है।

लंबित मामलों पर भी विभाग सख्त

गोपालगंज के तत्कालीन CO राज नारायण राजा पर आरोप है कि दाखिल-खारिज के मामलों को एक वर्ष से अधिक समय तक लंबित रखने और इस पर पूछे गए स्पष्टीकरण का जवाब नहीं दिया। जिसके बाद उनके दो वेतनवृद्धि संचयी प्रभाव से रोकने का आदेश दिए जाने की जानकारी है।

इसके अलावा खगड़िया सदर के CO पुनीत कौशल सहित बेलदौर के CO अमित कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू किए जाने का विवरण उपलब्ध है।

सवाल सिर्फ कार्रवाई का नहीं, जवाबदेही का भी

कुढ़नी के पूर्व CO के खिलाफ या अन्य जिलों के राजस्व विभाग में अनियमितताओं के आरोप सामने आने पर केवल आरोपपत्र या निलंबन तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि प्रत्येक मामले में समयबद्ध जांच हो, दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार दंड दिया जाए और अधिकारियों को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिले।

बहरहाल जिन मामलों में आम नागरिकों की जमीन के दस्तावेज प्रभावित हुए हैं, वहां अभिलेखों की समीक्षा, गलत प्रविष्टियों के नियमानुसार सुधार और शिकायतों के निष्पादन की व्यवस्था की जानी चाहिए।

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