मुजफ्फरपुर शहर को जाम से मुक्त रखने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए नगर आयुक्त ऋतुराज प्रताप सिंह की अध्यक्षता में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की अहम बैठक हुई, जिसमें ऑटो और ई-रिक्शा संचालन को लेकर सख्त निर्णय लिए गए। जिसके अनुसार अब ऑटो-ई-रिक्शा की क्यूआर कोड से होगी निगरानी, लेकिन सवाल लाइसेंस को लेकर भी है।
शहर की यातायात व्यवस्था ठंड शुरू होने के पहले इतनी चरमराई हुई थी कि खुद मुजफ्फरपुर शहर के एक वरीय पुलिस अधिकारी जाम में लंबे फंस गए। उसके अगले दिन से जाम और अतिक्रमण पर ऐसा डंडा चलना शुरू हुआ कि लोगों के सामने जीविकोपार्जन की समस्या आने लगी थी। तब कहा गया था कि अगले 20 दिसंबर 2025 के बाद लोगों को जाम से मुक्ति मिलने लगेगी। इसकी जिम्मेदारी तत्कालीन नगर आयुक्त विक्रम वीरकर को दी गई थी।
लेकिन विक्रम वीरकर के तबादले के बाद अब इसे सुधारने की जिम्मेदारी नगर आयुक्त ऋतुराज प्रताप सिंह के ऊपर आ गई, जिनकी अध्यक्षता में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की अहम बैठक हुई, जिसमें ऑटो और ई-रिक्शा संचालन के लिए तय किया गया कि सभी ऑटो और ई-रिक्शा चालक अपने निर्धारित जोन के निर्धारित रूट पर ही वाहन चलाएंगे। जिसके कार्यान्वयन के लिए ऑटो संघ को दो दिनों का समय दिया गया है।
वाहनों की पहचान और निगरानी के लिए ऑटो और ई-रिक्शा को क्यूआर कोड उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के ऑटो का शहर में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा, लेकिन मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की स्थिति में उन्हें छूट रहेगी। बैठक में सभी ऑटो स्टैंड को शीघ्र अतिक्रमण मुक्त कराने का निर्णय लिया गया। चालकों को नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए स्मार्टसिटी के पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम का सहारा लिया जाएगा।
बैठक में एसडीएम ईस्ट तुषार कुमार, डीटीओ सतेंद्र कुमार , ट्रैफिक डीएसपी महेश चौधरी तथा मुजफ्फरपुर ऑटो रिक्शा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष, महासचिव सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।










