अमेरिका से हुए ट्रेड डील में भारत ने कृषि उत्पाद और डेयरी क्षेत्र को संरक्षित तो कर लिया, लेकिन क्या 1971के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारत का सहयोग करने वाले देश रूस से दोस्ती खत्म हो जाएगी! इस बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है, जिसके अनुसार भारत के नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। और यहीं से असमंजस की स्थिति उत्पन्न होती है। भारत और अमेरिका की ट्रेड डील पिछले साल 2025 से टेबल पर बनती बिगड़ती रही। इस के विरोध में अमेरिका ने पहले 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाया, फिर भी भारत नहीं झुका तो 25 फीसदी का और इजाफा कर दिया। भारत के रुख को देखते हुए ट्रंप के सिपहसालार लगातार भारत के साथ ट्रेड डील पर बात करते रहे।
इस बातचीत का नतीजा यह हुआ कि 06 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका के बीच डील पक्की हो गई। इसके साथ ही 25 प्रतिशत की टैरिफ जो रूस से तेल आयात करने पर अमेरिका ने लगाई थी वो तो खत्म हुआ ही, पहले से लगी 25 फीसदी की टैरिफ भी कम होकर 18 प्रतिशत पर आ गई। लेकिन अमेरिका की एक शर्त भारत को माननी पड़ी कि अमेरिका 500 अरब डॉलर के उत्पाद का निर्यात करमुक्त करेगा।
क्या इस ट्रेड डील से हम उस मित्र राष्ट्र को खो देंगे जिसने 1971 के पाकिस्तान के साथ युद्ध में हमारी हर तरह से मदद की। अभी भारत रूस से कच्चे तेल का आयात कर रहा है। जिसका नतीजा यह है कि पिछले 3-4 सालों से भारत में पेट्रोल डीजल का मूल्य स्थिर है। इस पर शुक्रवार को भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान आया है जिसमें भारत ने ऊर्जा सुरक्षा नीति पर अपनी मंशा जाहिर की है। अब आने वाले समय में स्थिति साफ होगी कि ट्रेड डील पर भारत अपने नागरिकों की हित को कैसे सुरक्षित रखेगा।










