पूर्णिया के निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। जिसके बाद पटना के मन्दिरी में उनके आवास पर पुलिस पहुंच गई है। 3 दिन पहले ही उनके खिलाफ कोर्ट ने कुर्की जलती का आदेश दिया था।
35 वर्ष पुराने मामले में सांसद पप्पू यादव को गिरफ्तार करने के लिए उनके घर भारी पुलिस फोर्स पहुंची हुई है। पुलिस का कहना है कि कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद भी वह गिरफ्तारी वारंट मानने को तैयार नहीं है। गिरफ्तारी की भनक लगते ही पप्पू यादव के समर्थक भाड़ी तादाद में उनके घर पहुंचने लगे हैं और गिरफ्तारी का विरोध कर रहे हैं।
आखिर 35 साल पहले क्या हुआ था, जिसका जिन्न आज बाहर निकला है। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि दरअसल 35 साल पहले 1995 का है। विनोद बिहारी लाल के मकान को पप्पू यादव ने किराए पर लिया था। जिसका उपयोग मकान मालिक के अनुसार पार्टी कार्यालय के लिए लिया गया था। लेकिन उनसे यह सच्चाई छुपाई गई, जिसे विनोद बिहारी लाल ने धोखाधड़ी और धमकी देने की बात पर केस दर्ज करा दिया। कोर्ट से गिरफ्तार वारंट निकला जरूर लेकिन उसे तामील नहीं कराया जा सका।राज्य में राजद की सरकार थी, लालू यादव मुख्यमंत्री थे और ये तब राजद के सांसद थे।
यह गिरफ्तारी वारंट पप्पू यादव के अलावा शैलेन्द्र प्रसाद और चंद्र नारायण प्रसाद के खिलाफ जारी किया गया था। साथ ही इसी केस में अभी एमपी एमएलए कोर्ट द्वारा कुर्की जब्ती का आदेश भी जारी किया गया था।
इस पर पप्पू यादव ने सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि नीत की तैयारी करने वाली छात्रा की लड़ाई लड़ने के कारण सरकार ने यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर जहानाबाद और पटना में धरना देने वाले हैं चाहे सरकार जेल भेजे या फांसी दे दे।
घर किराए पर ले धोखाधड़ी और धमकी देने का मामला










