बिहार में मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य सफलतापूर्वक पूरे करने के बाद चुनाव आयोग ने भारत के अन्य राज्यों में भी SIR की प्रक्रिया की शुरुआत की। SIR को लेकर अब तक तो खट्टे खट्टे ही अनुभव मतदाताओं और चुनाव आयोग के अधिकारियों और BLO को मिले और अब तक का सबसे तनाव का माहौल पश्चिम बंगाल में ही मिला। जहां BLO और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं में कई जगह झड़प की खबर सुनने को मिली। वही एक ऐसा भी जिला है, जहां चुनाव आयोग के अधिकारी और BLO नाम सुनते ही हंसने लगते हैं
हम यहां बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश के मालवा जिले की। SIR के तहत अपडेट हो रहे मतदाता सूची में मतदाताओं के नाम सुन अधिकारियों के चेहरे पर मुस्कान देखते ही बनता है। नाम सुन के ऐसा लगता है कि जैसे आप के सामने ड्रायफ्रूट्स, चॉकलेट और पूरी फिल्म इंडस्ट्री आपके सामने ही है और आप जैसे पर्यटन पर इस कस्बे में आए हों।

बादाम, पिस्ता, काजू, शेरनी, कैडबरी, मेलोडी, राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, जितेन्द्र, हेमामालिनी, एंटीना, टीवी और भी बहुत हैं ये सब मतदाताओं के नाम है। असल में ये सारे अटपटे नाम पढ़ी समुदाय(Pardhi Community) के लोगों की है। समुदाय का नाम पढ़ी जरूर है, लेकिन इनमें अधिकांश पैसे गिनने तक ही पढ़े लिखे हैं। असल में इनका अपना कोई जमीन नहीं है, ये घुमंतू जीवन जीने वाले लोग हैं और ये सभी नाम इनके जीवन शैली में हैं। बच्चे के जन्म के समय जो चीज सामने दिखा उसी पर उसका नाम रख दिया।
SIR की प्रक्रिया में शामिल BLO बताते हैं कि जब पहली बार नाम सब का सुना तो लगा सब मजाक उड़ा रहे हैं। लेकिन सच्चाई पता लगी तो उसके बाद से तो अब ये सारे नाम रोजमर्रा की की तरह लगते हैं। प्याज बाई, सारंगपुर वार्ड, दिलीप कुमार, माधुरी दीक्षित, कुरकुरे, ब्रिटेनिया, सन्नी देओल सुन सुन के अब BLO भी कहने लगे हैं कि इस तरह के नामों से इतने फॉर्म भड़े है कि फिल्म इंडस्ट्री के लोग मुझे फिल्मों में ही काम दे दें।
एक मतदाता “देशप्रेमी” ने बताया कि जिस दिन मेरा जन्म हुआ , उस दिन मेरे पिता देशप्रेमी फिल्म देखने गए थे। वापस आए तो साथ में मेरा नाम भी लेते आए “देशप्रेमी”। असल में यह समुदाय आंखों से दिखती चीज़ों की पहचान करता है और उसे ही अपने जीवन में उताड़ लेता है। क्यूं कि ये पढ़े लिखे तो है नहीं, इसलिए आसपास की दिखती वस्तुओं पर बच्चों के नाम रख देते हैं।










