पैराग्लाइडर्स के जहाज से कूदने के कई कारनामे सामने आ चुके हैं। कुछ पैराग्लाइडर्स ने शादियां या रिंग सेरेमनी भी जहाज से छलांग लगा कर की है। लेकिन अंतरिक्ष से धरती की तरफ छलांग लगाना (स्पेस डाइविंग) अपने आप में एक हैरत अंग्रेज काम है। प्रयास तो कईयों ने किए लेकिन अब तक 3 ही लोगों को धरती पर सकुशल उतरने में सफलता प्राप्त हुई है।
इस खबर को अभी बताने के पीछे के उद्देश्य क्या है वो जान लीजिए। दरअसल भारत सरकार खुद को स्पेस इंजीनियरिंग में खुद को आत्मनिर्भर करना चाह रही है। अभी स्पेस इंजीनियरिंग में हमे दूसरे विकसित देशों के ऊपर निर्भर रहना पड़ता है। अब भारत स्पेस इंजीनियरिंग में रोज नए नए प्रयोग कर रहा है तो स्पेस डाइवर्स का भी अभ्यास का कार्यक्रम कर सकता है तो जो स्पेस या यूनिवर्स में रुचि रखते है उनके लिए ये जरूरी खबर हो सकती है।
अभी तक 3 लोगों ने स्पेस से धरती की तरफ डाइव किया है। उनमें सबसे ज्यादा प्रसिद्ध ऑस्ट्रेलिया के फेलिक्स बॉमगार्टनर रहे हैं। जिन्होंने 14 अक्टूबर 2012 को 128000 यानी लगभग 39 किलोमीटर से छलांग लगाई थी। छलांग के दौरान इन्होंने 1358 किमी प्रति घंटे की गति हासिल की और ध्वनि की गति को भी पार कर लिया। इस अवस्था को सुपरसोनिक स्पीड कहते हैं।
इनके पहले एक अमरीकी जोसेफ कीटिंगर अमेरिकी सैन्य पायलट थे इन्होंने 1960 में लगभग 29 मिल की ऊंचाई से छलांग लगाई थी और तीसरे एलन यूस्टेस ने 24 अक्टूबर 2014 को 41.5 किमी (135,890 फीट) से छलांग लगाकर सबसे ऊंची छलांग का रिकॉर्ड बनाया।
इन सभी ने हीलियम गुब्बारे से एक विशेष कैप्सूल के माध्यम से ऊंचाई प्राप्त की और विशेष दबाव वाले सूट पहनकर छलांग लगाई। अंतरिक्ष से छलांग लगाने के पीछे मुख्य वजह वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च-स्तरीय तकनीक का परीक्षण और मानवीय सहनशक्ति की सीमाओं की जांच करना है। स्पेस डाइविंग के वक्त डाइवर्स को ऑक्सीजन की कमी और वायुमंडल के घर्षण के कारण होने वाली गर्मी भी सहना पड़ता है।










