आज कल की राजनीतिक तस्वीर तो यही कहती है। अभी हालिया घटना महाराष्ट्र की देखिए। सीटें जीती मात्र 29 और और सब को कर दिया होटल में शिफ्ट। और ये डर किसी और से नहीं पुराने घर से ही है। बिहार में भी कुछ ऐसी ही परिस्थिति बनती दिख रही है। इसीलिए कहा कि “जीत में भी डर का माहौल” साफ साफ दिख रहा है।
असल में महाराष्ट्र में 9 साल बाद नगर निकाय के चुनाव में 23 नगर निकायों पर बीजेपी गठबंधन महायुति ने जीत का परचम लहराया। बड़े बड़े नेता जो खुद को मराठा वीर कहे जाते थे। सब का नाम इस चुनाव से खत्म हो गया। अब एक नया सितारा मराठा वीर के तौर पर उभर रहा है उसका नाम है देवेंद्र फडणवीस
बिहार में भी उलटफेर की संभावना होती दिखनेवाली है, ये आपको बताएंगे लेकिन देवेंद्र फडणवीस के बारे में बता दें कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को अब तक नागपुर का लड़का कहा जाता था। इस BMC के चुनाव में उन्होंने खुद को केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि रामसेवक, कारसेवक और महाराष्ट्र सेवक के रूप में प्रस्तुत किया।
अब आपको बताते हैं कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने पार्षद को बांद्रा के होटल में क्यों शिफ्ट किया। दरअसल उद्धव ठाकरे ने BMC चुनाव के बाद अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि 118 का आंकड़ा कोई बड़ा नबर नहीं मात्र 4 का अंतर है बहुमत से। बस यही बात एकनाथ शिंदे के लिए भय का कारण बन गया। आपको बता दें कि एकनाथ की श्वसन से 89 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे जिसमें 29 ने जीत हासिल की और उन्हें डर है कि उनके पार्षद अपने पुराने घर का रुख कर सकते हैं।
अब बिहार की बात, यहां भी राजद, कांग्रेस और उपेंद्र कुशवाहा की RLM में आपसी खींचतान चल रही है। कहा गया था कि मकर संक्रांति के बाद बिहार में कुछ बड़ा होने वाला है। आशंका ये जताई गई थी कि राजद में रोहिणी का तेजस्वी पर हमलावर होना मतलब अंदरखाने कुछ ठीक नहीं है। वहीं बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार के साथ बैठक के लिए कांग्रेस के विधायकों को बुलाया गया था।लेकिन ये विधायक नितिन नबीन के चुरा दही के भोज में दिखे लेकिन खुद की पार्टी के बैठक में नहीं पहुंचे। वहीं RLM के विधायकों का अपनी ही पार्टी से गुस्सा किसी से छिपा नहीं है।










