वज्जिका कला पर सार्वजनिक व्याख्यान एवं सम्मान समारोह का आयोजन
मुजफ्फरपुर स्थित बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में “वज्जिका कला की पुनः खोज (Rediscovery of Vajjika Art)” विषय पर एक सार्वजनिक व्याख्यान एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह व्याख्यान भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा एनआईएफटी, दिल्ली को दिए गए शोध अनुदान के अंतर्गत चल रहे प्रोजेक्ट “अनवीलिंग ऑफ वज्जिका आर्टिस्टिक ट्रेडिशन” के तहत आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT) दिल्ली के लेदर डिज़ाइन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. उज्ज्वल अंकुर द्वारा किया गया।
डॉ. उज्ज्वल अंकुर ने अपने संबोधन में वैज्जिका क्षेत्र की प्राचीन कलात्मक परंपरा, उसके स्वरूप, तकनीक, प्रतीक और सामाजिक संदर्भों पर आधारित अपने शोध को उपस्थित श्रोताओं के सामने रखा तथा वज्जिका कलाकारों को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया
कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति, बी.आर.बी. बिहार विश्वविद्यालय ने दीप प्रज्वलित कर किया। अपने उद्घाटन संबोधन में कुलपति ने डॉ. उज्ज्वल अंकुर एवं वज्जिका कलाकारों को उनकी गहन अध्ययनशीलता और इस लोककला के पुनर्जीवन के लिए किए जा रहे अतुलनीय कार्यों के लिए बधाई दी।
इस अवसर पर स्वर्गीय सच्चिदानंद चौधरी, स्वर्गीय प्रो. प्रणय कुमार और आनंद कुमार को क्रमशः वज्जिका संस्कृति, कला और शिक्षा के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
इसके अतिरिक्त, वज्जिका कला के 11 चयनित कलाकारों को, जिन्होंने एनआईएफटी दिल्ली में आयोजित 7 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला में भाग लिया था, कुलपति एवं डॉ. अंकुर द्वारा सम्मान-पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही, विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों और संगठनों से आए युवा कलाकारों एवं विद्यार्थियों को वज्जिका कला पर आयोजित कार्यशालाओं में सहभागिता के लिए प्रशस्ति-पत्र भी प्रदान किए गए।
कार्यक्रम का आकर्षण केंद्र रहा “बारहमासा” विषय पर आधारित वज्जिका चित्र प्रदर्शनी, जिसमें अनेक वज्जिका कलाकारों की उत्कृष्ट कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गईं। प्रदर्शनी ने दर्शकों को वैज्जिका क्षेत्र की जीवन-संवेदना, ऋतु-चक्र और सांस्कृतिक समृद्धि से परिचित कराया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित वज्जिका कवि सम्मेलन में ज्वाला सांध्य पुष्प, मणिभूषण प्रसाद ‘अकेला ‘, अखौरी चंद्र शेखर, अवधेश तृषित, डा. विद्या चौधरी, उदय नारायण सिंह, रामकिशोर सिंह चकवा, प्रीति सुमन, डा. भावना, हेमा सिंह, उषा किरण, साधना कृष्ण, प्रमोद नारायण मिश्र, अमिताभ कुमार सिन्हा और अन्य कवियों ने अपनी रचनाओं से समा बाँध दिया।
कार्यक्रम के अंत में गोपाल फलक ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, कलाकारों, आयोजकों एवं उपस्थित जनों का आभार प्रकट किया।
इस अवसर पर आनंद कुमार, संस्थापक – NBI को भी विशेष धन्यवाद दिया गया, जिन्होंने इस सुव्यवस्थित आयोजन में मुख्य भूमिका निभाई।
इस आयोजन से न केवल वज्जिका कला को एक नई पहचान मिलेगी, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक धरोहर के पुनर्जीवन की दिशा में एक सशक्त कदम भी सिद्ध होगा।








