वेद-पुराणों पर बढ़ता वैज्ञानिकों का भरोसा..जीवन ब्रह्मांड से आया!

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अंतरिक्ष से लाए गए एक एस्टेरॉयड के टुकड़े ने पैनस्पर्मिया थ्योरी को वापस जिंदा कर दिया है। विश्व के बड़े वैज्ञानिकों की संस्था भी अब मानने लगी है कि धूमकेतु ने ही धरती पर जीवन का बीज बोया।

पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति अब तक रहस्यों में उलझी पड़ी है। कितने वैज्ञानिकों ने अपना जीवन इस रहस्य को उजागर करने में लगा दिया, लेकिन यह अब भी अनसुलझा है। अब नासा और जापान की स्पेस एजेंसी को एक ऐसी चीज हाथ लगी है की इसने एक पुरानी थ्योरी को नया जीवन दे दिया है।

20 अरब साल पुराने बेनू एस्टेरॉयड की चट्टान के परीक्षण ने नासा जैसी संस्थाओं के वैज्ञानिकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। चट्टान में जीवन के 14 अमीनो एसिड और डीएनए-आरएनए के बीज मिले हैं। पैनस्पर्मिया थ्योरी वापस जिंदा हो गई है कि जीवन अंतरिक्ष से आया, धूमकेतु ने इसका बीज धरती पर बोया।

नासा ने सितंबर 2016 में जीवन की उत्पत्ति को समझने के लिए OSIRIS-REX  मिशन की शुरुआत की थी। इस मिशन का काम था पृथ्वी के सबसे नजदीक के 20 अरब साल पुराने क्षुद्रग्रह बेनू की चट्टान से नमूने एकत्र करना। यह नमूने 2023 में पृथ्वी पर पहुंचा। और 2025 में इस नमूने का परीक्षण शुरू किया गया। परीक्षण के दरम्यान जो नतीजे आए उसने वैज्ञानिकों को चौका दिया।

परीक्षण से जो जानकारी निकल कर आई उसके अनुसार जीवन के लिए जरूरी 20 एमिनो एसिड में से 14 एमिनो एसिड इस नमूने में पाए गए। अमीनो एसिड प्रोटीन के बिल्डिंग ब्लॉक हैं, जो जीवन की बुनियाद हैं। डीएनए और आरएनए के पूर्वज केमिकल भी मिले जो आनुवंशिक कोड बनाते हैं, वो भी पाए गए। वैज्ञानिकों ने स्पेक्ट्रोस्कोपी और अन्य टेस्ट से कन्फर्म किया।

बेनू एस्टेरॉयड: सौर मंडल का प्राचीन खजाना

बेनू एक कार्बन से भरपूर एस्टेरॉयड है। जब सूर्य और ग्रह के बनने की शुरुआत हुई थी तब भी ये सौर मंडल के शुरुआती दिनों में उपस्थित थे- नासा का OSIRIS-REX मिशन 2020 में बेनू पर पहुंचा। 2023 में यह चट्टान के छोटे-छोटे टुकड़े (करीब 121 ग्राम) पृथ्वी पर लाया। जो पृथ्वी के बनने से पहले के हैं। यानी ये 20 अरब साल से भी पुराने हैं। वैज्ञानिक कहते हैं, बेनू जैसे ही अनेकों एस्टेरॉयड ने जीवन के बीज बोए।

पैनस्पर्मिया थ्योरी: जीवन अंतरिक्ष से आया

पैनस्पर्मिया का मतलब है ‘सभी से बीज’। यह थ्योरी कहती है कि जीवन के लिए जरूरी तत्व- जैसे अमीनो एसिड और कार्बनिक यौगिक अंतरिक्ष से आए। इन्हें धूमकेतु या क्षुद्रग्रहों ने पृथ्वी तक पहुंचाया। इस थ्योरी में जीवित जीवों की जरूरत नहीं। बस मजबूत अणु चाहिए, जो किसी भी रहने लायक दुनिया पर जीवन चालू कर सकें। बेनू से एकत्र नमूनों ने इस अवधारणा को मजबूत किया।

वेदों और पुराणों में जीवन की अवधारणा

भारतीय अवधारणा के अनुसार, जीवन की उत्पत्ति ईश्वर या दैवीय शक्ति द्वारा मानी जाती है, जहाँ भगवान ब्रह्मा को सृष्टिकर्ता माना जाता है, जबकि अन्य अवधारणाएं पुनर्जन्म और जीवन की शाश्वतता पर आधारित हैं। वैदिक विज्ञान के अनुसार, जीवन एक ऊर्जा है जो पदार्थ को जीवित बनाती है, कुछ लोग भारतीय धर्मग्रंथों में विकासवादी विचारों का पूर्वाभास पाते हैं, जैसे कि भगवान विष्णु के दशावतार जो मछली से शुरू होते हैं।जबकि आधुनिक विज्ञान इस विचार का खंडन करता है।

नासा जैसी अन्य एजेंसियां अब और सैंपल की जांच कर रही हैं। भविष्य में और कई सारे मिशनों जैसे हैबल या जेम्स वेब टेलीस्कोप से और डेटा आएगा। अगर पैनस्पर्मिया सही साबित हुई जो कि अपने प्रयोग के शुरुआती चरण में है तो यह कहना गलत नहीं कि जीवन अकेला नहीं- यह ब्रह्मांड का सामान्य नियम है।

 

Sandeepak Kumar
Author: Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

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