बिहार में SIR को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद भारतीय चुनाव आयुक्त ने नवंबर से 9 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया प्रारंभ कर दिया है। इस दौरान लगभग 50 करोड़ मतदाताओं की योग्यता को भी सत्यापित करने का लक्ष्य है। इसके लिए 4 दिसंबर तक की समयसीमा निर्धारित की है है। इसके बाद 9 दिसम्बर को मतदाताओं का ड्राफ्ट जारी किया जाएगा। इसके बात 8 जनवरी तक मतदाता किसी गड़बड़ी के लिए अपनी आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। 7 फरवरी को फाइनल मतदाता लिस्ट जारी कर दिया जाएगा।
इस प्रक्रिया को लेकर सबसे ज्यादा आपत्ति और हो-हंगामा बंगाल में ही हुआ। कई तरह की आपत्तिजनक बयान भी बंगाल के नेताओ और धर्मविशेष की तरफ से दिए गए। यहां तक कहा गया कि इस प्रक्रिया से बंगाल में लोग सुसाइड कर रहे है, बंगाल जल उठेगा। यहां तक कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक ने SIR का विरोध करते हुए कहा था कि यह SIR नोटबंदी की तरह वोटबंदी है, चाहे तो मेरा गला काट दें लेकिन किसी वोटर के नाम कटना नहीं चाहिए। बिहार में भी जब यह प्रकिया चल रही थी तब भी राहिल गांधी और तेजस्वी यादव इसके विरोध में खरे थे। लेकिन अंततः बंगाल में भी SIR शुरू हो चुका है। 80 हजार से अधिक BLO घर घर जाकर फॉर्म बांट रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक संगठन और मौलवियों ने SIR प्रक्रिया चलने तक अपने धर्म के लोगों के सहयोग के लिए आगे आए हैं। इमामों ने लगभग 40 हजार मस्जिदों से राज्य भर के मुस्लिम इलाकों से संपर्क स्थापित करना शुरू कर दिया है। मुसलमानों से अपील की जा रही है कि वो घबराएं नहीं, शांति बनाए रखें और फॉर्म को सावधानी पूर्वक भरें।
बंगाल के मौलवी और इमाम का कहना है कि धर्मग्रंथ से पहले का एक कर्तव्य यह भी है कि कौम के लोग अगर किसी कारणवश परेशानी में या घबराएं हुए हैं तो उनको जागरूक कर मदद करना भी जरूरी है। धार्मिक नेता और मस्जिद कमेटी के सदस्य हर मुस्लिम इलाकों में जाकर लोगों से मिलकर उनके फॉर्म भरवाने में मदद कर रहे हैं। साथ ही मस्जिदों के बाहर लोगों की सहायता के लिए हेल्प डेस्क स्थापित करना भी शुरू कर दिया है।








