शोषण का शिकार हो रहे कामगार
मुजफ्फरपुर के इंडस्ट्रियल क्षेत्र बेला में मजदूरों के साथ शोषण ही नहीं होता, बल्कि उन्हें कई तरह के यातनाओं से भी गुजरना पड़ता है, तब यही आवाज आती है कि मजदूरों की भी सुनो सरकार। बिहार से होने वाले पलायन ने बिहार को गरीब राज्य का दर्जा दे दिया गया। बिहार के सुशासन सरकार की कोशिश से लघु स्तर के कुछ उद्योग तो लगे, और स्थानीय मजदूरों को काम भी मिला लेकिन साथ में मिली यातनाओं से इनका जीवन दुश्वार हो गया।
इसको लेकर बेला के औद्योगिक क्षेत्र में यातनाओं से तंग आ कर सोमवार को सुदामा नंदी फाउंडेशन द्वारा असंगठित दैनिक मजदूर संघ के साथ विरोध में शांति मार्च निकाला। फैक्ट्री मालिकों द्वारा मजदूरों का शोषण करने एवं न्यूनतम मजदूरी नहीं देने के विरोध में यह शांति मार्च नारायणपुर माल गोदाम चौक से होते हुए, सभी फैक्ट्रियों के सामने से गुजरी। विरोध में शामिल मजदूरों ने कहा कि वेतन काट कर दिया जाता है। ओवरटाइम की मजदूरी नहीं दी जाती। 10-10 घंटे काम लिया जाता है। महिला मजदूरों को छुटियां तक नहीं दी जाती।
इसको लेकर सुदामा नंदी फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री नंदन कुमार झा सरपंच शेरपुर एवं श्री राजीव रंजन तिवारी उपाध्यक्ष ने कहा कि मजदूरों की स्थिति बदतर है। फैक्ट्री मालिक द्वारा मजदूरों का शोषण किया जाता है। उन्हें न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जाता और ना ही समय पर वेतन दिया जाता है। ESI और PF और यहां तक कि इन्हें श्रम आइडेंटिटी कार्ड की सुविधा भी उपलब्ध नहीं कराई जाती है। फाउंडेशन की मांग है कि महिला मजदूरों को न्यूनतम 12500 और पुरुषों को 18000 का वेतनमान निर्धारित किया जाए और काम के 8 घंटे सुनिश्चित किया जाए।
लावण्या एंटरप्राइजेज के HR Head सचिन मेहता के अनुसार उनके कर्मचारियों को कंपनी से कोई आपत्ति नहीं है। आपको बता दें कि लावण्या एंटरप्राइजेज का पारले बिस्किट्स के साथ टाइअप है। इनके कर्मचारियों को वो सारी सुविधाएं मिलती है जो भारत सरकार के द्वारा कंपनी और कर्मचारियों के हित में बनाए गए हैं।








