मुजफ्फरपुर के आनंद संकुल स्तरीय संगठन सकरा को हैदराबाद में मिला राष्ट्रीय सम्मान
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और महिलाओं को आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाने में बिहार की जीविका दीदियो ने इतिहास रचा है। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के आनंद संकुल स्तरीय संगठन (सीएलएफ) सकरा को हैदराबाद में एपमॉस तेलंगाना द्वारा आयोजित विशेष सम्मेलन में 40,000 रुपये का चेक, शील्ड, प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान योजना आयोग तेलंगाना के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्ना रेड्डी के द्वारा दिया गया।
450 संगठनों में से चुना गया आनंद सीएलएफ
इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में देशभर के 18 राज्यों के कुल 450 संकुल स्तरीय संगठनों ने भागीदारी हेतु निबंधन कराया। सघन मूल्यांकन एवं चयन प्रक्रिया के बाद केवल 13 सीएलएफ को विभिन्न जोनों से राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार के लिए चुना गया। पूर्वी जोन में आनंद सीएलएफ, सकरा ने प्रथम स्थान प्राप्त कर बिहार के लिए गौरव हासिल किया। संगठन की ओर से कार्यक्रम में श्रीमती रूबी कुमारी एवं श्रीमती सुशीला कुमारी ने पुरस्कार ग्रहण किया।

सम्मेलन से लौटने के बाद आनंद सीएलएफ की पूरी टीम ने जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन से मिलकर पुरस्कार की जानकारी दी और अनुभव साझा किया। जिलाधिकारी ने जीविका दीदियों के निरंतर रचनात्मक, नवोन्मेषी एवं प्रभावी कार्यों की प्रशंसा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और निरंतर प्रगति की शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने भी सराहा था मुजफ्फरपुर का नवाचार
इसके पहले मुजफ्फरपुर जिले में जीविका दीदियों के द्वारा सोलर पंप से सिंचाई का अनोखा और अद्वितीय मॉडल सफलतापूर्वक लागू किया गया है, जिसकी सराहना स्वयं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने राष्ट्रीय संबोधन में की थी। यह मॉडल ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था में ऊर्जा दक्षता, लागत में कमी और महिलाओं की आमदनी बढ़ाने का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है।
महिलाएं हो रहीं आत्मनिर्भर
जीविका दीदियों के सतत प्रयासों से जिले के गांवों में आर्थिक और सामाजिक बदलाव की नई कहानी लिखी जा रही है। स्वरोजगार, सामूहिक उत्पादन, माइक्रो एंटरप्राइजेज, स्वच्छता, पौधारोपण, बकरी पालन, मशरूम उत्पादन आदि क्षेत्रों में इन महिलाओं ने उल्लेखनीय प्रगति की है। इससे न केवल परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि ग्रामीण सामाजिक ढांचा भी सकारात्मक रूप से परिवर्तित हुआ है।








