बाबा रामदेव की कंपनी के उत्पाद पर समय समय पर विवाद खड़ा होता रहा है। उसी कड़ी में पतंजलि का गाय का घी लैबोरेटरी जांच में फेल हो गया। जिस पर कोर्ट ने भी जुर्माना ठोक दिया है। हालांकि कंपनी ने कोर्ट के इस आदेश को त्रुटि पूर्ण और नियम विरुद्ध करार दिया है।
हर्बल और प्राकृतिक तौर पर तैयार सामान बेचने का दावा करने वाली योगगुरु बाबा रामदेव की पतंजलि फिर से विवादों में घिरती नजर आ रही है। पतंजलि पर गाय का घटिया घी बेचने का आरोप लगा है। इसके लिए कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और इसके वितरक पर कुल 1.40 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। लेकिन कंपनी ने सफाई देते हुए कहा है कि कोर्ट का यह आदेश त्रुटि पूर्ण और नियम के विरुद्ध है।
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पतंजलि घी के निर्माता, वितरक और खुदरा विक्रेता पर क्रमशः 1.25 लाख और 15 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। पिथौरागढ़ के सहायक खाद्य सुरक्षा आयुक्त ने बताया कि 2020 में घी के सैंपल इकट्ठा किया गया और रुद्रपुर के राज्य खाद्य प्रयोगशाला में जांच करवाया गया जहां यह सैंपल गुणवत्ता में फेल हो गया। इसके बाद 2021 में व्यापारियों ने केंद्र की प्रयोगशाला में जांच कराने का अनुरोध किया, वहां भी 2022 में फेल हो गया।
इसके बाद एडीएम पिथौरागढ़ की अदालत में इन तीनों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के धारा 46/4 के तहत मामला दर्ज किया था। जिसमें 2 साल बाद ये फैसला लिया। इसके बाद पतंजलि के तरफ स्पष्टीकरण दिया गया कि जिस रेफरल प्रयोगशाला NABL लैब में यह जांच कराया गया वो लैब गाय की घी की जांच के लिए नहीं है। जिन पैरामीटर पर घी की जांच की गई तक ये लागू ही नहीं था। दूसरी बार जब जांच की गई तब तक सैंपल एक्सपायर्ड हो चुकी थी।
पतंजलि आयुर्वेद ने अपनी सफाई में यह भी कहा कि कोर्ट ने तर्कों पर विचार किए बिना प्रतिकूल आदेश पारित किया है, जो विधि सम्मत नहीं है। कंपनी ने इस आदेश के विरुद्ध फूड सेफ्टी ट्राइब्यूनल में अपील दायर करने की बात कही है। ट्राइब्यूनल में हम अपनी बात ठोस आधार पर रखेंगे। संभावना है कि यहां से जो फैसला आयेगा वो हमारे पक्ष में होगा।








