2014 के बाद से रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर विपक्ष के नेताओं के द्वारा जो राजनीति शुरू हुई, आज वो न्यायाधीशों तक पहुंच गई है। आज विपक्ष न्यायपालिका और न्यायाधीशों तक को कटघरे में खड़ा कर रहा है। इसमें सबसे आगे TMC के नेता हैं।
मंगलवार को रोहिंग्या के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में चर्चा हो रही थी जहां भारत के कुछ समूह रोहिंग्या मुस्लिमों को भारत में शरणार्थी का दिलाने की मांग कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि घुसपैठिये और अवैध प्रवासी भारत में किसी भी तरह के कानूनी अधिकार के हकदार नहीं हैं। दरअसल सुप्रीम कोर्ट में पांच रोहिंग्या मुस्लिमों के अवैध प्रवासीयों के संबंध में दायर हैबियस कॉर्प्स याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यहां गौर करने वाली बात यह है कि ये पांचों रोहिंग्या मुस्लिम हिरासत के बाद से लापता हैं।
इसी कड़ी में जब शीर्ष अदालत ने तीखा सवाल कर पूछा कि क्या घुसपैठियों के स्वागत के लिए रेड कार्पेट बिछाना चाहिए कि जबकि खुद भारत के नागरिक खुद गरीबी से जूझ रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की टिप्पणी पर TMC संसद कल्याण बनर्जी की प्रतिक्रिया ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद ने कहा कि पहले के जज फैसले में अपनी बातें कहते थे। टीएमसी सांसद ने मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी पर कहा कि ‘सब जांच को लूस कमेंट नहीं करना चाहिए। पहले जो थी हमारे भारतीय न्यायपालिका में जज लोग कम बार करते थे और जजमेंट को जो बोलना है, वो।बोलते थे। आजकल जज लोग ज्यादा बात करते हैं टीआरपी बढ़ाने के लिए। जजमेंट नहीं देते हैं।’
इसको लेकर अब भाजपा भी टीएमसी भी हमलावर हो गई है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि ‘न्यायालय पर टिप्पणी कर टीएमसी ने सारी सीमा लांघ दी है। जब CJI (Chief Justice of India) ने कहा कि रोहिंग्याओ के लिए रेड कार्पेट नहीं बिछाया जा सकता तो इस पर टीएमसी न्यायालय पर ही हमला बोल रही है।’ शहजाद पूनावाला ने कल्याण बनर्जी के TRP वाले बयान पर कहा कि “यह TRP के लिए नहीं बल्कि आपके वीआरपी यानी वोट बैंक रेटिंग पॉइंट के लिए थी।” पूनावाला ने कल्याण बनर्जी की वो बात भी याद दिलाई कि कैसे TMC सांसद ने पूर्व उपराष्ट्रपति की मिमिक्री की थी। टीएमसी पर हमला बोलते हुए यहां तक कहा कि कैसे एसआईआर को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग तक को परिणाम भुगतने की चेतावनी तक दे डाली थी।










