बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के अंतर्गत लाभुकों को राशन देने के लिए अनाज की भरपाई दूसरे राज्यों से कर बिहार के उपज की उपेक्षा की जा रही है। इसको लेकर अनाज की अधिकतम खरीद राज्य के किसानों से किए जाने की माँग अब और मजबूती से उठाई जा रही है।
इस को लेकर एक सर्वदलीय शिष्टमंडल जिसमें बिहार के प्रमुख राजनीतिक दलों के सदस्यों ने सोमवार को माननीय सहकारिता मंत्री, डॉ. प्रमोद कुमार चन्द्रवंशी, बिहार सरकार से मुलाकात की। मुलाकात में इस बात पर जोड़ दिया गया कि बिहार में PDS के अंतर्गत जो अनाज वितरण किया जा रहा है वो बिहार के उपज को ही सरकार किसानों से खरीद कर वितरित करे। इससे बिहार के किसानों को उपज का सही मूल्य मिलेगा और किसान समृद्धि होंगे।
बैठक में यह बात उठाई गई कि PDS के अंतर्गत जो अनाज खरीदे जाते है वो पंजाब और अन्य राज्यों से मंगवाए जाते हैं जिसे परिवहन पर अधिक पैसा खर्च किया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक FCI दरों के अनुसार प्रति टन ₹1,200–₹1,600 तक की परिवहन लागत आती है। जिससे प्रतिवर्ष लगभग 4000 करोड़ का व्यय केवल परिवहन पर खर्च हो रहा है।
आपको बता दें कि पिछले पांच सालों में PDS के माध्यम से लगभग 4 करोड़ टन अनाज का वितरण बिहार में किया गया है जिसमें बिहार के किसानों की भागीदारी मात्र 2 करोड़ टन धान और गेहूं के अनाज के रूप में रही है। और इसमें भी MSP और स्थाई बाजार का लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाया है।
अगर यही अनाज बिहार के किसानों से खरीदी जाए तो किसानों की आय में वृद्धि होगी और किसान समृद्धि होंगे। साथ ही परिवहन पर जो लागत आ रही है, उसमें भी बचत होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गुणात्मक सुधार होगा।
सहकारिता मंत्री ने सारी बातों को सुना और सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करने और किसान हित व राज्यहित दोनों को ध्यान में रखते हुए ठोस कार्यवाही करने का आश्वासन दिया। इस बैठक में सपोर्ट फाउंडेशन के अध्यक्ष रंगीश ठाकुर, वरिष्ठ भाजपा नेता सह सीनेट सदस्य मनोज वत्स, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुकेश त्रिपाठी और राजद के प्रदेश महासचिव विनोद प्रसाद यादव शामिल थे।








