हाइकोर्ट के आदेश पर साल 2006 से 2015 के बीच के नियुक्त नियोजित शिक्षकों की मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र की जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो कर रही है। अब तक लगभग साढ़े 6 लाख डिग्रियों की जांच की गई है जिसमें 2912 डिग्रियां फर्जी पाई गई है और 1707 पर FIR दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि अब तक 6 लाख 46 हजार शैक्षणिक मूल प्रमाणपत्रों की जांच हो चुकी है। विभाग हर महीने जांच की प्रगति की समीक्षा कर रहा है। 2025 में निगरानी की जांच व्यवस्था पहले से तेज हुई है। इस साल 2025 में अब तक 126 नई FIR अलग अलग जिलों में दर्ज कराई गई है।
ब्यूरो के मुताबिक बड़ी संख्या में 2006 से 2015 के बीच नियुक्त शिक्षकों के मूल प्रमाण पत्र फर्जी पाई गए हैं। एक जो सब बड़ी जानकारी चौंकाने वाली खबर यह है कि विश्वविद्यालय और बोर्डो से सत्यापन के दौरान फर्जीवाड़ा कर प्रमाण पत्र बनाने वाले बड़े रैकेट का भी उजागर हुआ है। अभी जांच चल रही है, जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई में भारी संख्या में शिक्षकों की नौकरी समाप्त हो जाएगी।
आपको एक बात और बता दें कि हाइकोर्ट ने निगरानी से जांच का जिम्मा 2014 में ही दे दिया गया था लेकिन कतिपय कारणों और विभाग और शिक्षकों की मिलीभगत से मामला लटकता रहा। अभी थोड़ी तेजी देखने को जरूर मिल रही है। वैसे एक बात और 2912 डिग्रियां फर्जी जरूर पाई गई है। लेकिन इस बीच कई शिक्षक अपनी नौकरी की उम्रसीमा खत्म कर सेवामुक्त हो चुके होंगे। अब शिक्षा विभाग या निगरानी आगे इस जांच में क्या करती है यह देखने वाली बात होगी।








