बिहार के हिजाब विवाद ने पूरे देश में एक वैचारिक वैमनस्यता का माहौल बना दिया था। डॉ. नुसरत परवीन के नौकरी ज्वाइन करने को लेकर पूरे 23 दिन अटकलों का बाजार गर्म रहा। लेकिन 7 जनवरी 2026 को यह अंजाम तक पहुंचा जहां डॉ. नुसरत परवीन ने आयुष विभाग में अपना योगदान दिया।
15 दिसम्बर को पटना में मुख्यमंत्री सचिवालय में 1283 आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र का वितरण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा किया जा रहा था। उसी समारोह में डॉ. नुसरत परवीन को भी नियुक्ति पत्र दिया गया। लेकिन नीतीश कुमार को पता नहीं क्या सूझी कि उन्होंने डॉ. नुसरत का हिजाब अपनी हाथों से खींचने की कोशिश की और यह वाक्या वहां मौजूद कैमरों में कैद हो गया।
इसके बाद इस समारोह का फोटो और वीडियो आग की तरह पूरे भारत में फैल गया। जहां तरह तरह की बातें की शुरू हो गई और बाद में इसने धार्मिक और राजनीतिक रूप ले लिया। इस घटना के बाद परवीन बिना योगदान दिए अपने घर वापस बंगाल चली गईं। इसके बाद कयासों और अफवाहों का बाजार गर्म होने लगा। इन 23 दिनों में डॉ. परवीन का योगदान न होने पर यह बात भी सामने आई कि वो पदभार ग्रहण नहीं करेंगी। लेकिन अंततः 7 जनवरी 2026 को उन्होंने विभाग में योगदान दे दिया।
हालांकि उनके योगदान को लेकर राज्य सरकार की तरफ से 3 बार पदभार ग्रहण करने की सीमा बढ़ाई गई। सबने पदभार ग्रहण किया लेकिन वो एकमात्र नियुक्ति पत्र पाने वाली चिकित्सक रहीं, जिन्होंने जब तीसरी बार योगदान करने की समय सीमा बढ़ाई गई तब जाकर उन्होंने पदभार ग्रहण किया। लेकिन यहां आपको बता दें कि भारत में हिजाब प्रकरण पहली बार नहीं हुआ।
इसका सबसे ताजा मामला कर्नाटक का है जहां कॉलेज में हिजाब पहनने को लेकर बहुत बवाल मचा था। साल 2022 में कर्नाटक में हिजाब पहनी छात्राओं को कॉलेज में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई थी। बाद के दिनों में कर्नाटक सरकार द्वारा कॉलेज में हिजाब पहन कर प्रवेश की अनुमति न देने का आदेश जारी किया था। जिसके 1 साल बाद कर्नाटक के चुनाव में बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी और उनकी सरकार नहीं बन पाई।











