मुजफ्फरपुर समाहरणालय में पिछले कई दिनों से मनरेगा मजदूरों का धरना-प्रदर्शन जारी हैं। मनरेगा के तहत काम नहीं मिलना, लम्बित भुगतान, जॉब कार्ड, ekyc एवं VB – G RAM G बिल वापस लेना इनकी मुख्य मांगे थी। आज 8 जनवरी 2026 को khabarjindagi.com के सहयोग से DPO मुजफ्फरपुर से मनरेगा के मजदूरों का एक प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात हुई जहां लगभग आधी मांगे इनकी मान ली गई हैं। लेकिन लिखित आश्वासन अब तक नहीं मिला है।
दरअसल इनकी जो मांगें हैं उनमें से कुछ जो DPO (District Program Officer) मुजफ्फरपुर के क्षेत्राधिकार में आती हैं वो तो लगभग पूरी करने की बात और उसमें त्रुटियों को सुधारने की बात जरूर डीपीओ अमित कुमार उपाध्याय ने कही है।
मनरेगा मजदूरों का कहना है कि नाम बदल कर 125 दिनों की मजदूरी की बात की गई है लेकिन आज तक 50 दिन से ज्यादा का काम नहीं मिला। कईयों के तो जॉब कार्ड आज तक नहीं बन पाए। काम उन्हें ही मिलता है जो मुखिया या पंचायत प्रतिनिधियों को रिश्वत का चढ़ावा चढ़ाते हैं। जो नहीं रिश्वत देते उन्हें काम नहीं मिलता।
इन मजदूरों का कहना ही कि जिले के कुढ़नी , गायघाट , सकरा , मुरौल , कटरा , औराई , बंदरा , बोचहा , मीनापुर , मुशहरी , कांटी सहित विभिन्न प्रखंड के दो चार पंचायत में काम देकर बाकी पंचायतों में मनरेगा मजदूरों को काम देना बंद कर दिया गया है। जब से मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ( ग्रामीण) बिल सरकार के द्वारा लाया गया है। तब से जिला और विभिन्न प्रखंड के पदाधिकारी की ओर से कहा जा रहा है की मनरेगा के तहत काम देने का कोई दिशा निर्देश नहीं आया है।
1दिसंबर और 3 दिसंबर 2025 को विभिन्न प्रखंड के मजदूरों की सूची भी अपर विकास आयुक्त कार्यालय में दिया गया था उससे पहले विभिन्न प्रखंड में भी आवेदन और लिस्ट दिया गया था, फिर भी काम नहीं दिया गया। काम कराने के बाद तब के किए गए कार्य का भुगतान भी नहीं किया गया है। और तो और जॉब कार्ड नंबर भी नहीं दिया गया। इन मजदूरों का कहना है कि जब तक इनकी मांगे पूरी नहीं होगी तब तक धरना जारी रहेगा।








