डीएमके सांसद ने बिहार सहित पूरे उत्तरभारत के लड़कियों के लिए एक विवादास्पद बयान दिया है। सांसद ने कहा है कि उत्तरभारत के लोग लड़कियों को पढ़ाते नहीं हैं बल्कि उनसे घर का काम कराते हैं। उन्हें घर में रोक लिया जाता है साथ ही उन्हें नौकरी नहीं करने देते हैं।
डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने यह विवादास्पद बयान चेन्नई के कैद ए मिल्लत महिला विद्यालय में दिया। सांसद में कहा कि दक्षिण भारत में लड़कियों को पढ़ने और करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। जबकि बिहार सहित पूरे उत्तर भारत के लिए कहा कि यहां लड़कियों को घर में रोक लिया जाता है, उनसे घर का काम कराया जाता है, उन्हें पढ़ाया नहीं जाता और न ही उन्हें नौकरी करने की आजादी है।
अगर अभी आंकड़े निकाल दिए जाएं तो बिहार में सबसे ज्यादा लड़कियां और महिलाएं कामकाजी होंगी। जिस तरह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं के लिए जीविका सहित कई स्वयं समूह संस्थाओं से जुड़कर काम कर रही हैं उतना तो खुद तमिलनाडु में भी नहीं होगा।
बिहार में जीविका जैसे स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर 1.4 करोड़ (14 मिलियन) से ज़्यादा महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। इसके साथ लगभग 7 लाख लड़कियां और महिलाएं बिहार सरकार के अन्य विभागों में कार्यरत हैं।
वहीं तमिलनाडु के महिलाओं की स्थिति पर नजर डालें तो लगभग साढ़े 4 लाख सरकारी नौकरियों में हैं और 82 लाख से ज्यादा महिलाएं स्वयं सहायत समूह से जुड़ी हुई हैं। जबकि बिहार की गिनती गरीब राज्यों में की जाती है, इसके बावजूद बिहार महिलाओं के उठान में तमिलनाडु से ऊपर है। यहां एक बात गौर करने की है कि 2011 के जनगणना के अनुसार महिला साक्षरता में तमिलनाडु (73.44) बिहार (51.5) से ऊपर है।
डीएमके सांसद दयानिधि मारन की बात राजनीति से भी प्रेरित हो सकती है। क्यूंकि एक तो डीएमके सिर्फ तमिलनाडु तक ही सीमित है। दक्षिण के अन्य राज्य में डीएमके का कोई जनाधार नहीं है साथ ही डीएमके यूपीए गठबंधन में शामिल है जो केंद्र में विपक्षी गठबंधन में हैं। केंद्र में एनडीए की सरकार है और उसके मुख्य घटक दल का शासन दक्षिण के एक राज्य सहित पूर्व, पश्चिम और उत्तरभारत के अधिसंख्य राज्य में है।








