सच यही है कि मुजफ्फरपुर राज्य ट्रांसपोर्ट से इलेक्ट्रिक यात्री बसों का परिचालन होना है और इसके तैयारी भी चल रही है। बिल्डिंग और प्लेटफार्म तक तैयार हो चुका है। कुछ छोटे मोटे काम बाकी हैं जो संभवतः फरवरी के अंतिम हफ्ते तक पूरा हो जाने की संभावना है। लेकिन इन सब के बीच बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।

मुजफ्फरपुर राज्य ट्रांसपोर्ट से इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन होना है जिसके लिए डिपो के अंदर 33 केवी लाइन के लिए पावर हाउस तैयार किया जा रहा है। जिसका काम फरवरी के अंत तक पूरा हो जाने की उम्मीद है। जिसके बाद यहां चार्जिंग पॉइंट बनाया जाएगा जिसके बाद लगभग 4 चार्जिंग पॉइंट मशीनें लगेंगी। मुजफ्फरपुर डिपो को 40 इलेक्ट्रिक बस की सौगात मिलने की संभावना जताई जा रही है।

इस सबके बीच मुजफ्फरपुर राज्य ट्रांसपोर्ट हाइटेक तो हो रहा है पर बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। इस डिपो में न पीने का शुद्ध पानी है और न ही शौचालय की कोई व्यवस्था। पानी तो लोग खरीद कर पोते हैं। ऐसा नहीं है कि यहां टंकी नहीं है या पानी सप्लाई की व्यवस्था नहीं है। बड़ा सा पानी का टंकी इसके प्रांगण से बिल्कुल सटे लगा हुआ है जो संभवतः 10 हजार हेलन का होगा। बावजूद इसके टोटी ही कोई चुरा ले गया है। छोटी टंकी 500 लीटर की है, लेकिन किसी काम की नहीं है।

अब दूसरी बुनियादी सुविधा शौचालय की देख लीजिए, जिसकी कोई सुविधा नहीं है। एक तरफ महिला शौचालय दीवार पर लिखा जरूर है लेकिन उस पर ताला लगा है। विषम परिस्थितियों में पास में उपलब्ध सुलभ शौचालय की तरफ रुख करना होता है और उसके लिए पैसे शुल्क के तौर पर देना पड़ता है। यहां के ड्राइवर, कंडक्टर और खलासी सहित यात्रियों ने बताया कि बहुत परेशानी है, लेकिन क्या करें यात्रा तो करनी ही है। यहां तक कि चालन प्रभारी गोलू चौधरी ने बताया कि कई बार पटना परिवहन विभाग को इसके लिए सूचित किया गया है, लेकिन विभाग कुंभकर्णी निंद्रा में सोया हुआ है।
23 जनवरी को बिहार के मुख्यमंत्री का समृद्धि यात्रा के तहत मुजफ्फरपुर का दौरा है, जहां 172 कार्ययोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी। नीतीश कुमार से लोगों ने आग्रह किया है कि मुजफ्फरपुर आ रहे हैं तो मुजफ्फरपुर राज्य ट्रांसपोर्ट के डिपो आएं और देखे कि कैसे बुनियादी सुविधाओं से वंचित यात्रा करने को मजबूर हैं।










