यूजीसी द्वारा 15 जनवरी को जारी किए गए नए नियम के प्रति आक्रोश अब भारत के हिंदी भाषी क्षेत्रों में फैलने लगा है। इसके विरोध में जहां जिलों के सवर्ण प्रशासनिक अधिकारी भी इस्तीफा देने लगे हैं वहीं कवि कुमार विश्वास ने #UGC_Rollback के साथ अपनी बातें कविता के माध्यम से रखी हैं।

आज यूजीसी के खिलाफ उसके दिल्ली स्थित दफ्तर के बाहर छात्रों का जोरदार प्रदर्शन चल रहा है। इसको देखते हुए प्रशासन की जबरदस्त नाकेबंदी दिख रही है, साथ ही भारी पुलिस बल की भी तैनाती की है गई। इधर हिंदी भाषी राज्यों में भी पुरजोर प्रदर्शन हो रहा है। कही पुतले जलाए जा रहे हैं तो कही बीजेपी के झंडे को आग के हवाले किया जा रहा है।
वही मशहूर कवि और वक्ता डॉ. कुमार विश्वास ने यूजीसी के Equity Committee से जुड़े मुद्दे पर एक तीखा ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने कहा “मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ, मेरा रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा”। उनका यह ट्वीट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और शिक्षा व्यवस्था, आरक्षण, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक विचारधारा पर अब एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
यूजीसी के नियम के विरोध में बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने नाम पट्टिका पर अपने नाम के सामने खुद Resign शब्द लिखा। जिसके बाद उन्हें DM आवास में 2 घंटे तक बंदी बनाए रखा गया। तब इन्होंने लखनऊ सचिव को फोन किया इसके बाद वो आवास से बाहर निकल पाए। उनके इस कृत्य पर सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया है। क्यूं कि इन्होंने आधिकारिक स्तर पर सरकार को कोई पत्र नहीं दिया था।

वहीं बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी असहमति जताई है और उन्होंने बीजेपी से त्यागपत्र भी सौंप दिया है। इसके अलावा ब्रजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक ने यूजीसी के इस नियम के प्रति अपनी असहमति व्यक्त कर सरकार से आग्रह किया है ।कि इस कानून को एक बार रिव्यू करें। आपको बता दें कि प्रतीक बीजेपी से विधायक भी हैं।
कह सकते हैं कि यूजीसी के इस Equity Committee के कारण सवर्णों का विरोध बढ़ता जा रहा है। इनका कहना है कि नियम में जाती वर्ग की जगह ये लिखा होता कि किसी के साथ भी भेदभाव किया जाएगा तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन यूजीसी ने जाती वर्ग का नाम रखा, विरोध उससे है।










