अब डिलीवरी कंपनियों को अपने हर डिलीवरी बॉय या गिग वर्कर्स से अपना चरित्र प्रमाण पत्र जमा कराना पड़ेगा। यह आदेश बिहार के हर जिले में लागू होगा। सुरक्षा के दृष्टिकोण से बिहार पुलिस ने यह कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया गया है।
पुलिस प्रशासन की तरफ से हर कंपनियों को यह कहा गया है कि वह उनके यह काम कर रहे हर कार्यरत कर्मियों की सुरक्षा प्रोफाइल को गंभीरता से लें। इसके लिए हर गिग वर्कर्स से आचरण प्रमाण पत्र लेकर नजदीकी थानों में जमा कराएं। इसमें पुराने कर्मियों पर भी यह नियम लागू किया गया है। सभी का प्रमाणपत्र एक निश्चित समय सीमा के अंतर्गत जमा कराने को बोला गया है। अगर कोई वर्कर ऐसा नहीं करता है तो नियोक्ता कंपनी के ऊपर भी कार्रवाई की जा सकती है।
गिग वर्कर्स क्या होता है गिग वर्कर्स अस्थायी, स्वतंत्र ठेकेदार या फ्रीलांसर होते हैं जो किसी कंपनी के साथ पूर्णकालिक कर्मचारी के रूप में नहीं, बल्कि अनुबंध-आधारित या project-based कार्य करते हैं। वे आम तौर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करके काम प्राप्त करते हैं और उन्हें कार्य के आधार पर भुगतान किया जाता है। इन्हें नियमित वेतन नहीं मिलता बल्कि कार्य के लगने वाले समय के अनुसार भुगतान किया जाता है।
यह नियम केवल स्थानीय स्तर के गिग वर्कर्स पर ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से आकर बिहार में काम करने वाले गिग वर्कर्स पर भी लागू होगा। आईजी ने बताया कि दूसरे राज्यों की पुलिस से आने वाले वेरिफिकेशन अनुरोधों और रिपोर्टों पर भी त्वरित कार्रवाई की जा रही है। जैसे ही बाहरी राज्यों से किसी वर्कर का सत्यापन रिकॉर्ड प्राप्त होता है, उस पर भी तुरंत प्रक्रिया शुरू कर संबंधित विभाग को भेजा जा रहा है।
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा मानकों के पालन में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आईजी ने चेतावनी दी है कि यदि कोई कंपनी बिना पुलिस सत्यापन के गिग वर्कर्स को नियुक्त करती है, तो उस पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस कदम के बाद अब बिहार में डिलीवरी और राइडिंग सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के बीच हड़कंप की स्थिति बन गई है।










